Hartalika Teej 2026: पहली बार रख रही हैं हरतालिका तीज का व्रत? जानें सुबह से लेकर पारण तक का पूरा रूटीन

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 हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं. कई महिलाएं यह व्रत मनचाहे जीवनसाथी की कामना से भी रखती हैं. हरतालिका तीज का व्रत कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि परंपरागत रूप से इसमें निर्जला व्रत रखा जाता है. यानी व्रत के दौरान अन्न के साथ पानी का सेवन भी नहीं किया जाता. इसलिए पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए इसलिए यह जानना जरूरी है कि दिन की शुरुआत कैसे करनी है, पूजा की तैयारी कब करनी है और व्रत का पारण कब किया जाता है.

कब है हरतालिका तीज 2026?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 14 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी. इसलिए उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा.

सुबह उठते ही क्या करें?
अगर आप पहली बार हरतालिका तीज का व्रत रख रही हैं तो सुबह जल्दी उठकर दिन की शुरुआत करें. स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की सफाई करें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है. परंपरा के अनुसार, हरतालिका तीज से पहले सरगी या फलाहार करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में होती है. अगर आपके परिवार में यह परंपरा है तो सूर्योदय से पहले अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार भोजन या फलाहार कर सकती हैं. इसके बाद व्रत शुरू करें.

व्रत के दौरान दिन कैसे बिताएं?
संकल्प लेने के बाद दिनभर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें. इस दिन कोशिश करें कि आपका अधिकतर समय पूजा-पाठ, कथा सुनने और धार्मिक गतिविधियों में बीते. घर में पूजा की तैयारी भी दिन में ही कर लें, पूजा के लिए शिव-पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर, पूजा की सामग्री, फूल, फल, मिठाई और अन्य जरूरी सामान पहले से तैयार रखा जा सकता है. अगर आप पहली बार निर्जला व्रत रख रही हैं तो बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने से बचें.

हरतालिका तीज की पूजा कब और कैसे करें?
हरतालिका तीज की पूजा शाम के समय करने की परंपरा है. इसलिए सबसे पहले पूजा स्थान पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें. कई जगहों पर हरतालिका तीज के दिन बालू या मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी है. इसके बाद भगवान शिव-पार्वती को फूल, बेलपत्र, फल, मिठाई आदि अर्पित किए जाते हैं. पूजा के दौरान हरतालिका तीज की कथा जरूर सुनें या पढ़ें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें.

रात में क्या करें?
हरतालिका तीज में रातभर जागरण की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है. महिलाएं भजन-कीर्तन करती हैं और भगवान शिव-पार्वती का स्मरण करते हुए रात बिताती हैं. हालांकि अगर आप पूरी रात नहीं जाग सकती हैं तो अगले दिन सुबह पूजा करके व्रत को खोल सकती हैं. इससे व्रत का पुण्य कम नहीं होता है.

अगले दिन कब खुलेगा व्रत?
हरतालिका तीज का व्रत आमतौर पर अगले दिन पूजा के बाद पारण करके खोला जाता है. साल 2026 में हरतालिका तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 की सुबह 7 बजकर 44 मिनट के बाद किया जाएगा. पारण से पहले भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें और उनका आशीर्वाद लें. इसके बाद पानी पीकर धीरे-धीरे व्रत खोलें. लंबे समय तक निर्जला रहने के बाद अचानक बहुत ज्यादा खाना खाने से बचें.

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