Ganesh Chaturthi 2026: तीसरे, पांचवें, सातवें या अनंत चतुर्दशी पर…गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन कितने दिन बाद करना चाहिए?

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 भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल 14 सितंबर सोमवार के दिन घर-घर में गणपति स्थापना के बाद यह पावन उत्सव शुरू हो गया है. बप्पा की स्थापना के बाद भक्तों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि प्रतिमा का विसर्जन कितने दिन बाद करना चाहिए. गणेशोत्सव में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, संकल्प और सुविधा के अनुसार डेढ़ (1.5), तीन, पांच, सात या दस दिन यानी अनंत चतुर्दशी तक बप्पा को अपने घर लाते हैं. लोग अपनी परंपराओं के अनुसार विसर्जन का दिन तय करते हैं. आइए जानते हैं कि विसर्जन के अलग-अलग दिनों का क्या महत्व है और कौन सा दिन सबसे खास माना जाता है.

डेढ़ दिन में विसर्जन का नियम
जो लोग बहुत संक्षेप में यह उत्सव मनाते हैं, वे स्थापना के अगले दिन यानी डेढ़ (1.5) दिन बाद ही बप्पा का विसर्जन कर देते हैं. इस नियम में गणेश जी की स्थापना करने के बाद अगले दिन दोपहर बाद प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. कई लोग अपनी कम समय की सुविधा या अपनी संकल्प पूर्ति के लिए इस छोटे नियम को चुनते हैं. भले ही बप्पा केवल डेढ़ दिन के लिए घर में विराजमान रहें, लेकिन उतने समय में ही पूरे घर का माहौल पावन और भक्तिमय हो जाता है. पूरे भाव से पूजा-पाठ करके दोपहर बाद उन्हें जल में विलीन कर दिया जाता है. यह संक्षेप उत्सव भी उतना ही फलदायी माना जाता है जितना बड़ा उत्सव होता है.

विषम संख्या वाले दिनों का महत्व और परंपरा
कई परिवारों में बप्पा को तीन, पांच या सात दिनों के लिए घर में लाया जाता है. शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार विषम संख्या वाले दिनों यानी 3, 5 और 7 दिनों में प्रतिमा का विसर्जन करना बेहद शुभ माना जाता है. यह पूरी तरह से पारिवारिक परंपराओं और व्यक्ति की अपनी मन्नत पर निर्भर करता है. कई लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर पांच या सात दिन का संकल्प लेते हैं और पूरे नियम से बप्पा की सेवा करते हैं. इन सभी दिनों में सुबह और शाम दोनों समय विधि-विधान से पूजा और आरती की जाती है. फिर संकल्प पूरा होने पर तय किए गए दिन बहुत ही सम्मान के साथ बप्पा को विदाई दी जाती है.

अनंत चतुर्दशी का मुख्य दिन और विसर्जन का संदेश
अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन का सबसे मुख्य और शास्त्रसम्मत दिन माना गया है. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक पूरे दस दिनों तक बप्पा की सेवा की जाती है. दस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव सबसे बड़ा माना जाता है. विसर्जन का सबसे मुख्य संदेश यह है कि गणेश जी हमारे सारे दुखों और विघ्नों को अपने साथ ले जाकर पुनः जल तत्व में विलीन हो जाते हैं. जब बप्पा जल में विलीन होते हैं, तो वे अपने साथ भक्त के जीवन की सभी परेशानियां बहा ले जाते हैं. इसलिए अनंत चतुर्दशी पर बहुत ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ बप्पा को विदाई देकर अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की जाती है.

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