Durga Visarjan 2026: दुर्गा विसर्जन के बाद कलश, नारियल और ज्वारे का क्या करें? न कर बैठें ये गलतियां!

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आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो चुका है, जो इस बार 11 अक्टूबर से शुरू हो गया है. नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना के बाद विसर्जन का समय आता है. इस साल दुर्गा विसर्जन 20 अक्टूबर को किया जाएगा और उसके लिए सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 01:14 बजे से दोपहर 03:30 बजे तक रहेगा. विसर्जन से पहले मां दुर्गा को घर आने के लिए धन्यवाद कहना चाहिए.

दुर्गा विसर्जन के दिन मां जया और विजया के पूजन के साथ शम्मी और अपराजिता का पूजन कर माता से विजय और अपराजेय होने का आशीर्वाद लें. विसर्जन के दौरान कलश और नारियल से जुड़ी विधियों का पालन करना बेहद शुभ माना जाता है. सही तरीके से कलश के जल और नारियल का उपयोग करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. आइए जानते हैं विसर्जन के समय नारियल और कलश का क्या करना चाहिए.

नवरात्रि के बाद कलश के पानी और नारियल का क्या करें? जानिए यहां | after  Navratri kalah aur nariyal visarjan niyam - NDTV India
कलश के नारियल और सिक्के के उपयोग का सही नियम
विजयपुर और विसर्जन के समय कलश के ऊपर रखा नारियल घर की विवाहित महिला को दे दें या फिर इसे लाल कपड़े में बांधकर घर के मंदिर में रख सकते हैं. इसके साथ ही कलश में डाला गया सिक्का निकालकर उसे लाल कपड़े में बांधकर घर या दुकान की तिजोरी में रखें. ऐसा करने से घर में खुशहाली और बरकत बनी रहती है.

विसर्जन से पहले रोली, अक्षत, फल, फूल, मिठाई और वस्त्र अर्पित करें और श्रद्धा से भगवती की शक्तियों की आरती करें. मां दुर्गा को सिन्दूर अर्पित करें और परिवार के सदस्यों को सिन्दूर लगाएं. जब आप कलश के नारियल और सिक्के को सही स्थान पर रखते हैं, तो माता रानी का आशीर्वाद हमेशा परिवार पर बना रहता है और नकारात्मकता दूर होती है.

कलश के जल, अक्षत और ज्वारे के विसर्जन की विधि
कलश और सामग्री का विसर्जन करते समय कलश के जल का आम के पत्तों से पूरे घर में छिड़काव करें. बाकी जल को किसी पौधे या गमले में डाल दें. यह जल परिवार के सदस्यों पर भी छिड़कना चाहिए. अक्षत को घर के मुख्य द्वार पर लाल कपड़े में बांधकर टांग दें, इससे नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है.

अगर आपने ज्वारे बोए हैं तो उन्हें अपने कान पर रखें और फिर किसी पवित्र नदी या तालाब में विसर्जित करें. ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ माता रानी के जयघोष के बीच मूर्ति को उठाएं और किसी पवित्र नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें. इस प्रकार कलश के जल और ज्वारे का सही उपयोग करने से पूजा पूरी तरह सफल मानी जाती है.

विसर्जन के बाद कलश की सामग्री का क्या करें?
विसर्जन के बाद कलश की सभी सामग्रियों का सही विधि से उपयोग करना बहुत जरूरी माना जाता है. कलश के ऊपर रखे नारियल को घर की किसी विवाहित महिला को दे देना चाहिए या फिर इसे लाल कपड़े में बांधकर अपने घर के मंदिर में रख सकते हैं. इसके अलावा कलश में डाले गए सिक्के को निकालकर लाल कपड़े में बांध लें और उसे घर या दुकान की तिजोरी में सुरक्षित रख लें. कलश के जल को आम के पत्तों की सहायता से पूरे घर में छिड़कना चाहिए और बचा हुआ जल किसी पौधे या गमले में डाल देना चाहिए. अक्षत को लाल कपड़े में बांधकर मुख्य द्वार पर टांगने से नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है. ज्वारे को कान पर रखकर पवित्र जल में विसर्जित किया जाता है.

Soumya Chaurasia
Soumya Chaurasia

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