धनतेरस पर यम दीप जलाते समय न करें ये गलतियां, जानें सही दिशा और जरूरी नियम

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धनतेरस का त्योहार इस साल शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन सोना-चांदी और नए बर्तन खरीदने के साथ दीपदान की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपक जलाने को विशेष महत्व दिया गया है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। धनतेरस पर दीपक जलाने की परंपरा केवल मुख्य द्वार तक सीमित नहीं है। घर के मंदिर, तुलसी के पौधे, रसोई और छत सहित कई स्थानों पर दीपक रखने का विधान बताया जाता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में इस दिन कुल 13 दीपक जलाने की बात कही गई है। इनमें यम दीपक को सबसे प्रमुख माना जाता है। इस बार जयपुर के लिए धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 8 बजकर 7 मिनट तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

Dhanteras Yam Deepak: धनतेरस पर यम का दीपक जलाते समय न करें ये गलती! क्या  है सही दिशा और शुभ समय... जानें पूजा विधि और खास मंत्र - correct procedure  for lighting

धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की मान्यता

धार्मिक परंपरा के अनुसार धनतेरस की शाम 13 दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि 13 की संख्या स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक है। इनमें यमराज के नाम से जलाया जाने वाला दीपक विशेष महत्व रखता है। इसे यम दीप या यम दीपदान कहा जाता है। यम दीपक जलाने का उद्देश्य परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना करना है। इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखने की परंपरा है। हालांकि, दीपक जलाने से ग्रह दोष या बीमारी दूर होने जैसे दावे धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रभाव नहीं समझना चाहिए।

घर की इन 8 जगहों पर जलाएं दीपक

धनतेरस की शाम घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार हर स्थान पर दीपक रखने का अपना धार्मिक महत्व है। इन आठ जगहों पर दीपदान किया जा सकता है।

1. मुख्य द्वार के बाहर यम दीपक

धनतेरस पर सबसे महत्वपूर्ण दीपक यमराज के नाम से जलाया जाता है। इसे घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। परंपरा में इसके लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार की रक्षा होती है।

2. घर के मंदिर में मां लक्ष्मी और कुबेर के सामने

पूजा घर में मां लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा के सामने दीपक जलाने का विधान है। यहां शुद्ध देसी घी का दीपक रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने की कामना की जाती है।

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3. तुलसी के पौधे के पास

धनतेरस की शाम तुलसी के पौधे के नजदीक भी दीपक जलाया जाता है। इसके लिए देसी घी या तिल के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। हिंदू परंपरा में तुलसी को पूजनीय माना गया है। मान्यता है कि यहां दीपक रखने से परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।

4. मुख्य दरवाजे की देहरी पर

घर के प्रवेश द्वार के दोनों कोनों पर भी दीपक रखने की परंपरा है। इसके लिए तिल या सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मुख्य द्वार पर रोशनी करने से नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करतीं और घर का वातावरण शुभ बना रहता है।

5. रसोई घर में जलाएं दीपक

रसोई को घर की समृद्धि और भोजन से जोड़कर देखा जाता है। धनतेरस पर पीने के पानी के मटके या जल के स्रोत के पास घी का दीपक जलाने की परंपरा बताई गई है। इसे मां अन्नपूर्णा के प्रति श्रद्धा और पितरों के आशीर्वाद से जोड़कर देखा जाता है।

6. पीपल या बेलपत्र के पेड़ के पास

धार्मिक मान्यताओं में पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। धनतेरस पर घर के नजदीक पीपल या बेलपत्र के पेड़ की जड़ के पास सरसों के तेल का दीपक रखा जा सकता है। मान्यता है कि इससे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और ग्रहों से जुड़ी परेशानियों के प्रभाव कम होते हैं। पेड़ के पास दीपक रखते समय आग से सुरक्षा और आसपास के वातावरण का ध्यान रखना जरूरी है।

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7. घर की छत पर

घर की छत के किसी खुले और सुरक्षित कोने में भी दीपक जलाने की परंपरा है। इसके लिए तिल या सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छत पर दीपक रखने से अज्ञात भय, तनाव और मानसिक चिंताओं से मुक्ति की कामना की जाती है।

8. घर के ब्रह्मस्थान पर

वास्तु मान्यताओं में घर के मध्य भाग को ब्रह्मस्थान कहा जाता है। धनतेरस पर इस स्थान पर देसी घी या तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है। माना जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, तालमेल और शांति बनी रहती है।

धनतेरस पर दीपदान करते समय इन नियमों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपदान सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। दीपक जलाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

दीपक साफ और साबुत होना चाहिए। टूटा हुआ या खंडित दीया इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
यम दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए।
यम दीपक की लौ दक्षिण दिशा की तरफ रखने की परंपरा है।
 दीपदान के लिए मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
दीपक ऐसी जगह रखें जहां हवा से उसके गिरने या आग फैलने का खतरा न हो।

यम दीपक जलाने की सही विधि क्या है?

यमराज के नाम से जलाए जाने वाले दीपक को यम दीप कहा जाता है। इसे धनतेरस और छोटी दिवाली पर जलाने की परंपरा है। इसके लिए मिट्टी का चौमुखा यानी चार बत्तियों वाला दीपक लेने की मान्यता बताई गई है। इसमें सरसों का तेल डाला जाता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में दीपक के तेल में तांबे का सिक्का, थोड़ी कौड़ी या काले तिल डालना शुभ माना जाता है। इसके बाद प्रदोष काल में दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। परंपरा के अनुसार परिवार का कोई वरिष्ठ सदस्य यह दीपक रखता है। दीपक रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखने और सीधे घर के अंदर आकर हाथ-पैर धोने की मान्यता भी प्रचलित है। इसे यमराज के प्रति श्रद्धा और दीपदान की पारंपरिक विधि का हिस्सा माना जाता है।

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शनि और यम दोष से जुड़ी क्या है धार्मिक मान्यता?

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफल दाता और यमराज को धर्मराज कहा गया है। दोनों को न्याय और कर्म के सिद्धांत से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से धनतेरस पर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाने और पीपल के नीचे दीपदान करने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि की अशुभ दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव कम होते हैं। कुछ लोग इसे रुके हुए धन और पारिवारिक तनाव से राहत की कामना से भी जोड़ते हैं। ये ज्योतिषीय और धार्मिक विश्वास हैं; दीपदान को किसी बीमारी, आर्थिक समस्या या ग्रह संबंधी परेशानी का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए। दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। इसे पर्दों, कागज, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। छत, पेड़ या मुख्य द्वार पर दीपक ऐसी जगह रखें जहां उसे कोई गिरा न सके और आग फैलने की आशंका न हो।
 

Soumya Chaurasia
Soumya Chaurasia

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