Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में पहली बार करने जा रहे हैं कलश स्थापना तो इन नियमों का रखें पूरा ध्यान

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कल से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है. इस नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है. ये इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण भाग है. कलश स्थापना करके माता दुर्गा का आवाहन किया जाता है. कलश स्थापना पूरे नौं दिन के लिए की जाती है.ऐसे में अगर आप पहली बार नवरात्रि में कलश स्थापना करने जा रहे हैं, तो आपके लिए ये आवश्यक है कि आप इससे जुड़ी सभी बातों को जान लें. क्योंकि कलश स्थापना बहुत पावन काम होता है. इस दौरान भूलकर भी कोई गलती न करें. वरना मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं.

कलश स्थापना के नियम 
नवरात्रि पर मां दुर्गा को अपने घर में आमंत्रण देते हुए यानी उनका आवाहन करते हुए कलश स्थापना करें. इसके लिए शुभ मुहूर्त, सही विधि का पालन करें. कलश की स्थापना ईशान कोण यानी (उत्तर-पूर्व) दिशा में ही करें. दक्षिण या पश्चिम दिशा में पूजा न करें. कलश के नीचे का मिट्टी का पात्र ही लें. उसमें जौ बोएं. कलश तांबे, सोने, चांदी या मिट्टी का ही हो. कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें. कलश को कभी भी गंदे हाथ से या अपवित्र स्थिति में ना छुएं.

सबसे जरूरी बात कि नवरात्रि का कलश घर में स्थापित होने के बाद लहसुन-प्याज, नॉनवेज, नशे का सामान आदि तामसिक चीजें घर में न लाएं और न ही इनका सेवन करें. वरना मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं.

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कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 
चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. ये मुहूर्त सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. अगर किसी वजह से सुबह कलश स्थपना न कर पाएं तो इस मुहूर्त में करें.

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