धनु संक्रांति से फिर लग जाएगा मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध, जानिए कब से फिर शुरू होंगे विवाह-मुंडन आदि शुभ कार्य 

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 ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सूर्य ग्रहों के राजा हैं और सूर्य के राशि परिवर्तन का विशेष प्रभाव पड़ता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, 16 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति के नाम से जाना जाता है।  इस विशेष दिन पर सूर्य देव और भगवान विष्णु की उपासना का विधान है, कुछ क्षेत्रों में संक्रांति को पर्व के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि 16 दिसंबर से खरमास (Kharmas 2023) भी शुरू हो जाएगा और इस दौरान मांगलिक कार्यों पर पुनः प्रतिबंध लग जाता है। आइए जानते हैं, कब से कब तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य और दिसंबर मास में पड़ने वाले शुभ मुहूर्त। 

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धनु संक्रांति 2023 समय
पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 16 दिसंबर को शाम 04 बजकर 09 मिनट पर वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे, जिस वजह से इस दिन को धनु संक्रांति के नाम से जाना जाएगा।  इसी दिन से खरमास भी शुरू हो जाएगा। 

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दिसंबर शुभ मुहूर्त 2023
धनु संक्रांति से खरमास की शुरुआत हो रही है। ऐसे में 16 दिसंबर तक ही मांगलिक कार्य जैसे- विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार इत्यादि कार्य किए जाएंगे और अगले साल यानी 14 जनवरी 2024 तक यह रहेगा। वहीं पौष मास समाप्त होने बाद ही मांगलिक कार्य पुनः किए जाएंगे।  बता दें कि पौष मास का समापन 25 जनवरी 2024 के दिन होगा और इस दिन से मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध हट जाएगा। 

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इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
शास्त्रों में बताया गया है कि खरमास और पौष मास में मांगलिक कार्यों के आयोजन की मनाही है। इस दौरान सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। 
खरमास और पौष मास के दौरान रोजाना सूर्य देव को अर्घ्य प्रदान करें और मंत्रों का जाप करें। साथ ही इस मास में व्रत और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है।
खरमास में भगवान विष्णु की विशेष उपासना की जाती है। साथ ही इस मास में दान-पुण्य करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 
खरमास में शिव चालीसा और सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण और पाठन करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में रही सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती है और व्यक्ति को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। 

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