Adhik Mas Purnima 2026: अधिकमास पूर्णिमा पर कर लें बस इन चीजों का दान, चमक जाएगी सोई हुई किस्मत!

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सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए बहुत अधिक शुभ माना जाता है. वहीं जब पूर्णिमा अधिकमास में आती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है, इसलिए इस दौरान किए गए जप, तप, पूजा, स्नान और दान का विशेष फल प्राप्त होता है. साल 2026 में अधिकमास पूर्णिमा का व्रत 30 मई, शनिवार को रखा गया, जबकि 31 मई को भी पूर्णिमा तिथि का प्रभाव रहने के कारण श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन

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अन्न का दान
धार्मिक मान्यताओं में अन्नदान को सबसे बड़ा दान कहा गया है. अधिकमास पूर्णिमा के दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को चावल, गेहूं, दाल जैसी अन्य सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है. इससे घर में अन्न-धन की कमी नहीं रहती और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.

वस्त्र दान
पूर्णिमा के दिन जरूरतमंद लोगों को साफ और उपयोगी वस्त्र दान करना भी पुण्यदायी माना गया है. कहा जाता है कि वस्त्र दान से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं.

सफेद वस्तुओं का दान
पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा से माना जाता है. इसलिए इस दिन दूध, दही, चीनी, चावल और सफेद मिठाई जैसी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है. इससे मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

तिल और घी का दान
धार्मिक दृष्टि से तिल और घी का दान भी बहुत ही फलदायी माना गया है. मान्यता है कि इनके दान से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है.

जल से भरा कलश दान
गर्मी के मौसम में जल से भरा कलश, मटका या पानी की व्यवस्था करवाना भी पुण्य का कार्य माना जाता है. इससे प्यासे लोगों की सेवा होती है और व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है.

धार्मिक पुस्तकों का दान
अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण इस दिन गीता, विष्णु सहस्रनाम या अन्य धार्मिक पुस्तकों का दान करना भी शुभ माना गया है. इससे ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.

अधिकमास पूर्णिमा का क्या है विशेष महत्व?
मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास को भगवान विष्णु का उत्तम मास यानी ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है. श्रीहरि ने स्वयं इस महीने को अपना नाम दिया है, इसलिए इस दौरान की जाने वाली पूजा सीधे बैकुंठ धाम का टिकट दिलाती है. पूर्णिमा तिथि वैसे भी चंद्रमा और मां लक्ष्मी से जुड़ी होती है, लेकिन अधिकमास में आने के कारण इस दिन किया गया दान आपके सात जन्मों के पापों को काट सकता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में धन का अभाव है, मानसिक तनाव रहता है या भाग्य साथ नहीं दे रहा, उनके लिए अधिकमास की पूर्णिमा एक वरदान की तरह है. आज के दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय और दान को बहुत ही फलदायी माना गया है.

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