स्टॉक मार्केट में इनोविजन की कमजोर लिस्टिंग, पहले ही दिन आईपीओ निवेशक निराश

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स्टॉक मार्केट में इनोविजन की कमजोर लिस्टिंग, पहले ही दिन आईपीओ निवेशक निराश


नई दिल्ली, 23 मार्च (हि.स.)। टोल मैनेजमेंट और मैनपावर सर्विस देने वाली कंपनी इनोविजन के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में जबरदस्त गिरावट के साथ एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 519 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 466 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर 467.70 रुपये के स्तर पर हुई। इस तरह लिस्टिंग के साथ ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को लगभग 10 प्रतिशत का नुकसान हो गया। कमजोर लिस्टिंग के बाद बिकवाली के दबाव की वजह से इस शेयर में और गिरावट आ गई, जिसके कारण सुबह 11 बजे तक का कारोबार होने के बाद कंपनी के शेयर 384.80 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। इस तरह अभी तक के कारोबार के बाद कंपनी के आईपीओ निवेशकों 134.20 रुपये प्रति शेयर यानी 25.86 प्रतिशत का नुकसान हो चुका था।

इनोविजन का आईपीओ 10 मार्च को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। पहले इसकी क्लोजिंग की तारीख 12 मार्च और लिस्टिंग की तारीख 17 मार्च तय की गई थी, लेकिन 12 मार्च तक काफी कम सब्सक्रिप्शन आने के कारण क्लोजिंग को बढ़ा कर 17 मार्च और लिस्टिंग की तारीख को बढ़ा कर 20 मार्च कर दिया गया। इसके साथ ही इनवेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए कंपनी ने आईपीओ के प्राइस बैंड और इश्यू साइज में भी बदलाव किया। इस इश्यू के लिए पहले तय 521 रुपये से लेकर 548 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड को बदल कर 494 रुपये से लेकर 519 रुपये प्रति शेयर कर दिया गया।

क्लोजिंग की तारीख बढ़ाने और इश्यू के प्राइस बैंड को कम करने के बाद भी इनवेस्टर्स की ओर से इस इश्यू को एवरेज रिस्पॉन्स ही मिल सका, जिसके कारण ये ओवरऑल 3.46 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 14.30 गुना (एक्स एंकर) सब्सक्राइब हुआ था। वहीं नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 8.60 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन सिर्फ 0.60 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 58,91,284 शेयर जारी किए गए हैं। इनमें 255 करोड़ रुपये के 46,53,284 नए शेयर और 68 करोड़ रुपये के 12,38,000 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 8.88 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 10.27 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 29.02 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक कंपनी को 20 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 257.62 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 512.13 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 895.95 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक कंपनी को 483.10 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।

इस अवधि में कंपनी के कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 33.34 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 48.15 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 79.05 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 112.39 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 38.91 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में घट कर 33.45 करोड़ रुपये हो गया। वहीं 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस उछल कर 62.98 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 83.43 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 16.36 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 19.66 करोड़ रुपये हो और 2024-25 में उछल कर 51.75 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 30.42 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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