एनएसई पर लंबी अवधि में पैसा बना रहा है 'यंग इंडिया', शेयर बाजार तक हुई आम लोगों की पहुंच

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एनएसई पर लंबी अवधि में पैसा बना रहा है 'यंग इंडिया', शेयर बाजार तक हुई आम लोगों की पहुंच


नई दिल्ली, 26 मई (हि.स)। देश में शेयर बाजार का क्रेज अब सिर्फ दक्षिण मुंबई के पॉश इलाकों तक ही सीमित नहीं है। पहले यह सिर्फ अल्टामाउंट रोड, मालाबार हिल या बांद्रा जैसी जगहों तक था लेकिन, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की वजह से पिछले 30 सालों में माहौल बदला है। अब ग्रेटर नोएडा (यूपी) और रांची (झारखंड) जैसे शहरों के परिवार भी शेयरों और म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रहे हैं। वे अपनी बचत का पैसा उन स्कीमों में लगा रहे हैं जो इस स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं।

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस (डब्ल्यूएफई) के मुताबिक, ट्रेड की संख्या के मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इक्विटी एक्सचेंज है। इसमें शक नहीं कि एनएसई पर महाराष्ट्र, यूपी और गुजरात के निवेशकों का ही दबदबा है। वित्त वर्ष 2026 के अंत में कुल यूनिक रजिस्टर्ड निवेशकों में इनका हिस्सा क्रमशः 15.6 फीसदी, 11.7 फीसदी और 8.5 फीसदी रहा। लेकिन अब उन राज्यों में भी निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिनकी शेयर बाजार में भागीदारी पहले बहुत कम थी।

डब्ल्यूएफई के जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2015 के अंत में कुल रजिस्टर्ड निवेशकों में बिहार का हिस्सा सिर्फ 1.6 फीसदी था। वित्त वर्ष 2026 के अंत में यह बढ़कर 4.7 फीसदी हो गया। इसी तरह असम का हिस्सा वित्त वर्ष 2015 के अंत में सिर्फ 0.6 फीसदी था, जो वित्त वर्ष 2026 के अंत में यह बढ़कर 2.2 फीसदी हो गया।

डब्ल्यूएफई के मुताबिक इसमें हैरानी की बात नहीं है कि देश में आम लोगों को निवेशक बनाने और उनकी कमाई बढ़ाने में एनएसई सबसे आगे है। मई 2026 में एनएसई के रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 12.9 करोड़ पहुंच गई थी। इसके ठीक अगले महीने इसमें 12.3 लाख नए निवेशक और जुड़े। इस तरह यह आंकड़ा 13 करोड़ के पार निकल गया। आंकड़ों के अनुसार शुरुआती 1 करोड़ रजिस्टर्ड निवेशकों तक पहुंचने में एनएसई को 14 साल लगे थे लेकिन आज माहौल अलग है। दुनिया के इस सबसे बड़े मल्टी-एसेट क्लास एक्सचेंज पर अब औसतन हर 5 महीने में 1 करोड़ निवेशक जुड़ते हैं।

वित्त वर्ष 2026 में यूनिक क्लाइंट कोड (यूसीसी) की कुल संख्या 25 करोड़ (250 मिलियन) को पार कर गई। यह एक बार फिर दिखाता है कि देश में रिटेल निवेशकों का दायरा कितनी तेजी से बढ़ रहा है। वे लंबी अवधि में पैसा बना रहे हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2021 से 2026 के बीच एनएसई पर कुल निवेशकों की संख्या 26.4 फीसदी की सालाना कंपाउंडेड दर से बढ़ी। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2016 से 2021 के बीच यह बढ़त 15.2 फीसदी थी। आंकड़ों के अनुसार निवेशकों का यह दायरा पूरे देश में फैला है। अब देश के 99.85 फीसदी पिन कोड्स तक इसकी पहुंच हो चुकी है। साथ ही, महाराष्ट्र पहला ऐसा राज्य है जिसने वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में 2 करोड़ निवेशकों का आंकड़ा पार किया है।

डब्ल्यूएफई के मुताबिक अगर क्षेत्रों के हिसाब से देखें तो उत्तर भारत सबसे आगे है। यहां कुल 472.9 लाख यूनिक रजिस्टर्ड निवेशक हैं। इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र में 378.1 लाख निवेशक हैं। दक्षिणी क्षेत्र में 271.4 लाख और पूर्वी क्षेत्र में 156.3 लाख यूनिक रजिस्टर्ड निवेशक हैं। सालों से एनएसई ने फाइनेंशियल मार्केट तक लोगों की पहुंच बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसने टेक्नोलॉजी, पारदर्शिता और बड़े पैमाने के दम पर एक आधुनिक इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम बनाया है। एक्सचेंज ने ट्रेडिंग के लिए आसान और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर दिया है। साथ ही मार्केट से जुड़े इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स को सपोर्ट किया है। इन सब वजहों से देशभर के छोटे निवेशकों के लिए निवेश करना बेहद सरल, तेज और आसान हो गया है।

निवेशकों के इस बढ़ते दायरे की सबसे बड़ी खासियत 'यंग इंडिया' (युवा भारत) की बढ़ती भागीदारी है। एनएसई पर रजिस्टर्ड निवेशकों की औसत उम्र अब कम हो गई है। यह वित्त वर्ष 2021 के 36 साल से घटकर अब 33 साल से भी कम रह गई है। इसके अलावा, लगभग 40% निवेशक तो 30 साल से कम उम्र के हैं। आजकल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दौर है। मोबाइल से निवेश करना और अकाउंट खोलना बहुत आसान हो गया है।

इस आसान प्रोसेस ने नई पीढ़ी के निवेशकों को बढ़ावा दिया है। अब वे अधिक भरोसे और जागरूकता के साथ भारत की ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बन रहे हैं। भारत के युवा अब एनएसई को लंबी अवधि में पैसा बनाने का अच्छा जरिया मान रहे हैं। इससे उन्हें अपने तय किए गए फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने में मदद मिल रही है।

'बचत के पैसे को निवेश में बदलने' में एनएसई की भूमिका

सालों से एनएसई पर निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लोग अपनी बचत के पैसे को फाइनेंशियल मार्केट्स में ला रहे हैं। इसके पीछे एक्सचेंज का एक बड़ा फोकस रहा है। एनएसई लगातार निवेशक जागरूकता और फाइनेंशियल लिटरेसी (वित्तीय साक्षरता) पर काम कर रहा है। इस लक्ष्य को टियर-II, टियर-III और टियर-IV शहरों में पूरा किया गया है। इसके लिए वहां एजुकेशनल अभियान चलाए गए, डिजिटल प्रोग्राम किए गए और निवेशकों को जोड़ने की एक्टिविटीज की गईं। एनएसई ने हमेशा निवेशकों को ज्यादा जागरूक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए काम किया है।

इन कोशिशों से देश के फाइनेंशियल और स्टॉक मार्केट्स में लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। इससे पहली बार निवेश करने वाले लोगों को भी आगे आने का हौसला मिला है। आज एनएसई का योगदान सिर्फ शेयरों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। यह एक्सचेंज भारत के पूरे फाइनेंशियल सिस्टम का एक मुख्य स्तंभ बन चुका है। यह इक्विटी, म्यूचुअल फंड, ईटीएफ, आईपीओ, आरईआईटी और इनविट जैसे कई सेक्टर्स में लेनदेन को सपोर्ट करता है। चाहे कोई निवेशक सीधे शेयर बाजार में पैसा लगाए या सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए निवेश करे, एनएसई का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर काम आता है। यह भारत के कैपिटल मार्केट में हर किसी की भागीदारी को बेहद आसान और सुरक्षित बनाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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