गौतम अडाणी ने कहा-मेरे जीवन को संवारने में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण

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गौतम अडाणी ने कहा-मेरे जीवन को संवारने में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण


नई दिल्ली, 06 मार्च (हि.स)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने रविवार को उन महिलाओं के प्रति अपना आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके जीवन और सफर को संवारा है। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता की नींव उन मूल्यों और समर्थन पर टिकी है, जो उन्हें अपने परिवार से मिला।

गौतम अडाणी ने लिंक्डइन पर लिखे एक लेख में अपनी मां शांताबेन अडाणी को याद करते हुए लिखा कि कैसे बचपन में उन्होंने रामायण जैसे महाकाव्यों की कहानियां सुनाकर उनमें साहस, त्याग और कर्तव्य के मूल्यों को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि उन सीखों की गहराई उन्हें तब समझ में आई, जब 16 साल की उम्र में उन्होंने अपना करियर बनाने के लिए मुंबई जाने के लिए घर छोड़ा था। अडाणी ने उस मानसिक शक्ति को याद किया, जो उनकी मां ने उन्हें एक अनिश्चित भविष्य की ओर कदम बढ़ाने की अनुमति देते समय दिखाई होगी। इसके साथ ही अडाणी ने अपनी पत्नी प्रीति अडाणी की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने दंत चिकित्सा के करियर को छोड़कर ‘अडाणी फाउंडेशन’ का नेतृत्व संभाला।

उन्होंने बताया कि ‘अडानी फाउंडेशन’ आज देश के 22 राज्यों में शिक्षा, आजीविका और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है और अब तक एक करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में वो सकारात्मक बदलाव ला चुका है। अडाणी ने अपनी बहुओं, करण अडाणी की पत्नी परिधि अडाणी और जीत अदाणी की पत्नी दीवा अडाणी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे परिवार में ‘नया दृष्टिकोण और नई ऊर्जा’ लेकर आई हैं। साथ ही उन्होंने अपनी पोतियों से मिलने वाली खुशी का भी उल्लेख किया।

गौतम अडाणी ने अपनी व्यावसायिक यात्रा को याद करते हुए कहा कि भले ही उद्यमी बड़ी कंपनियों और संपत्तियों के निर्माण में दशकों लगा देते हैं, लेकिन इसका अंतिम उद्देश्य तो अगली पीढ़ी के लिए एक बेहतर भविष्य बनाना होता है। उन्होंने आगे कहा, ‘मैं हमेशा दो दुनिया… काम और परिवार के बीच रहा हूं। मैंने अपनी पहली दुनिया में जो कुछ भी बनाया है, वह मुझे दूसरी दुनिया से मिलने वाली ताकत के कारण ही संभव हो पाया है।

उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे मजबूत नींव कंक्रीट या स्टील से नहीं, बल्कि उन लोगों से बनती है जो हमें एक व्यक्तित्व प्रदान करते हैं। गौतम अडाणी ने अपनी मां को संस्कार देने के लिए पत्नी प्रीति को उनका पथ-प्रदर्शक (विवेक) बनने के लिए अपनी दोनों बहुओं परिधि और दीवा को परिवार में शक्ति, प्रतिभा और नया दृष्टिकोण लाने के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने अपनी पोतियों का जिक्र करते हुए कहा कि वे हर दिन यह याद दिलाती हैं कि हमारा भविष्य अगली पीढ़ी के योग्य होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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