टाटा समूह अर्थव्यवस्था के लिए अहम, बातचीत के जरिये सुलझाएं मतभेद : वित्त मंत्री सीतारमण

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टाटा समूह अर्थव्यवस्था के लिए अहम, बातचीत के जरिये सुलझाएं मतभेद : वित्त मंत्री सीतारमण


टाटा समूह अर्थव्यवस्था के लिए अहम, बातचीत के जरिये सुलझाएं मतभेद : वित्त मंत्री सीतारमण


नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। इसके नेतृत्व को अपने आपसी मतभेद सार्वजनिक करने के बजाय बातचीत के जरिए जल्द सुलझा लेने चाहिए।

सीतारमण ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। उन्होंने टाटा संस और उसके सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट के बीच चल रहे मौजूदा अंदरूनी विवाद को संवेदनशील बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इतने बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान का विवाद इस तरह सार्वजनिक होना ठीक नहीं है।

वित्त मंत्री ने कहा कि टाटा संस और उसके सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट के बीच जारी मतभेदों को जल्द से जल्द आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे सार्वजनिक मंच पर नहीं आना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कुछ कहने से इनकार कर दिया कि क्या सरकार दोनों पक्षों को बातचीत के लिए साथ लाने का प्रयास करेगी। उन्होंने इस मामले को संवेदनशील बताया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि समूह का नेतृत्व जल्द मतभेद दूर कर सामान्य स्थिति बहाल करेगा। वित्त मंत्री ने पारसी समुदाय के योगदान को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के योगदान से टाटा एक वैश्विक ब्रांड बना और समूह ने विभिन्न क्षेत्रों में अपना कारोबार फैलाया।

टाटा समूह में पिछले कुछ माह से मतभेद बने हुए हैं। यह विवाद 17 सितंबर को टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में खुलकर सामने आया, जब एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व वाले टाटा संस के निदेशक मंडल और उसके सबसे बड़े शेयरधारक नोएल टाटा की अगुवाई वाले टाटा ट्रस्ट के बीच मतभेद खुलकर सामने आए।

यह बैठक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का वह पत्र मिलने के एक सप्ताह के भीतर हुई थी, जिसमें उसने टाटा संस की मुख्य निवेश कंपनी के रूप में पंजीकरण रद्द करने की मांग ठुकरा दी थी। इस बैठक में आरबीआई के निर्देश के अनुसार कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने का फैसला किया गया। साथ ही, चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में फिर नियुक्त किया गया।

उल्लेखनीय है कि इस बैठक में नोएल टाटा ने अकेले इस फैसले का विरोध किया था। वहीं, टाटा ट्रस्ट के दूसरे नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने उनका साथ देने के बजाय बहुमत के पक्ष में मतदान किया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

Livevns.news Desk
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