आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.5 किया
मुंबई, 07 अक्टूबर (हि.स.)। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने बुधवार को वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के साथ प्रमुख नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट को करीब साढ़े तीन साल बाद 0.25 फीसदी बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। इसके साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 0.40 फीसदी बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सोमवार से शुरू तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों की बुधवार को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर गौर करते हुए एमपीसी ने आम सहमति से रेपो रेट को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 5.50 फीसदी करने का निर्णय किया। इसके साथ एमपीसी ने अपने रुख को ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘जरूरत के अनुसार सख्त’ करने का निर्णय किया।
मल्होत्रा ने बताया कि साथ ही चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया गया है, जो पहले 6.7 फीसदी था। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को पांच से बढ़ाकर 5.1 फीसदी किया गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नीतिगत दरों में आगे कटौती की संभावना नहीं है। इसमें या तो वृद्धि होगी या यह स्थिर रहेगी।
रेपो रेट यह वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने से आवास, वाहन और वाणिज्यिक कर्ज की मासिक किस्त बढ़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि यह फरवरी 2023 के बाद पहला मौका है जब नीतिगत ब्याज दर में वृद्धि की गई है। इससे पहले पिछले साल फरवरी से दिसंबर 2025 तक रेपो रेट में कुल 1.25 फीसदी की कटौती की गई थी। इस साल फरवरी, अप्रैल, जून तथा अगस्त की द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक में नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

