दुर्लभ पृथ्वी चुंबक विनिर्माण योजना को लेकर 25 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई

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दुर्लभ पृथ्वी चुंबक विनिर्माण योजना को लेकर 25 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई


दुर्लभ पृथ्वी चुंबक विनिर्माण योजना को लेकर 25 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई


नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स)। भारी उद्योग मंत्रालय की 7,280 करोड़ रुपये की ‘सिंटर्ड दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक’ विनिर्माण प्रोत्साहन योजना को लेकर मंगलवार को हुई बोली पूर्व बैठक में कम-से-कम 25 कंपनियों ने शिरकत की। इस बैठक में शामिल कंपनियों में जेएसडब्ल्यू ग्रुप एवं एनएलसी इंडिया के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) की ओर से 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना' के अंतर्गत संभावित बोलीदाताओं के लिए आयोजित बोली-पूर्व सम्मेलन को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। एमएचआई ने इससे पहले सीपीपी पोर्टल पर 7,280 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ योजना के अंतर्गत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष एकीकृत सिंटर्ड एनडीएफईबी रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए निर्माताओं के चयन के उद्देश्य से प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किया था।

मंत्रालय ने कहा कि बोली प्रक्रिया सीपीपी पोर्टल के माध्यम से न्यूनतम लागत प्रणाली (एलसीएस) के अंतर्गत तकनीकी और वित्तीय बोलियों सहित एक पारदर्शी द्वि-स्तरीय प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। बोली से संबंधित दस्तावेज 20 मार्च 2026 से सीपीपी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई है। इस बैठक में शामिल कंपनियों में जेएसडब्ल्यू ग्रुप एवं एनएलसी इंडिया के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

आरईपीएम सबसे शक्तिशाली परमानेंट मैग्नेट्स में से एक हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह योजना एकीकृत आरईपीएम विनिर्माण संयंत्रों के निर्माण में सहायता करेगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड को धातुओं में, धातुओं को मिश्र धातुओं में और मिश्र धातुओं को तैयार आरईपीएम में परिवर्तित करना शामिल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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