सरकार पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं को नए सिरे से विकसित करेगी : प्रल्हाद जोशी

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सरकार पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं को नए सिरे से विकसित करेगी : प्रल्हाद जोशी




नई दिल्ली/चेन्नई, 08 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार को चेन्नई में 'विंडर्जी इंडिया-2026' के 8वें संस्करण का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि सरकार देश में लगभग 25 गीगावाट क्षमता वाली पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं को नए सिरे से विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में प्रल्हाद जोशी ने देश में पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं और इसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले विशाल अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र ने मजबूत गति प्रदर्शन किया है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 में 6.05 गीगावाट (जीडब्ल्यू) की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक स्थापना हासिल की गई है। जोशी ने कहा कि हमें विश्वास है कि वार्षिक पवन ऊर्जा स्थापनाएं वित्त वर्ष 2026-27 में इस रिकॉर्ड को पार कर जाएंगी, जो भारत की पवन ऊर्जा यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रमाण होगा।

प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सितंबर तक पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 गीगावाट तक पहुंची है। यह निरंतर वृद्धि 2030 तक 100 गीगावाट स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की नींव को मजबूत करेगी और भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र के विकास को और गति प्रदान करेगी।

केंद्रीय मंत्री जोशी ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का रोडमैप प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर तमिलनाडु के ऊर्जा संसाधन एवं विधि मंत्री थिरु सी.टी.आर निर्मल कुमार, केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, पवन ऊर्जा संघों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ता भी उपस्थित थे।

'विंडर्जी इंडिया-2026' वैश्विक पवन ऊर्जा इकोसिस्टम को एक साझा मंच पर लाया है, जिसमें 20 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 400 प्रदर्शक, 500 प्रतिनिधि और डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन के समर्पित कंट्री पवेलियन (देश-विशिष्ट मंडप) शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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