पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा-ई20 से पांच फीसदी घट सकती है माइलेज लेकिन स्वच्छ दहन जैसे लाभ अधिक

WhatsApp Channel Join Now
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा-ई20 से पांच फीसदी घट सकती है माइलेज लेकिन स्वच्छ दहन जैसे लाभ अधिक


पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा-ई20 से पांच फीसदी घट सकती है माइलेज लेकिन स्वच्छ दहन जैसे लाभ अधिक


-सरकार ने ई-20 पेट्रोल पर दिया हर सवाल का जवाब, कहा-न इंजन खराब होगा, न पुरानी गाड़ियां होंगी बेकार...

नई दिल्ली, 10 जुलाई (हि.स)। ई20 पेट्रोल को लेकर देशभर में हंगामा बरपा है। ई20 यानी 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सवालों के घेरे में है। इसे लेकर उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार का जवाब आया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता (माइलेज) तीन से 5 फीसदी तक कम हो सकती है लेकिन इसके बदले मिलने वाली ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन और बेहतर इंजन प्रदर्शन जैसे लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

मंत्रालय के अनुसार इसके अलावा ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन, बेहतर पिकअप आदि जैसे लाभ भी इसमें शामिल हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम की आलोचनाओं का जवाब देने के लिए जारी प्रश्नोत्तर दस्तावेज में बताया कि ई20, ई10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में ‘‘अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक दक्ष ईंधन है।’’ इसे वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण, वाहन विनिर्माताओं के साथ परामर्श और घरेलू ईथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बाद ही लागू किया गया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस आशंका को खारिज किया कि यह कार्यक्रम जल्दबाजी में लागू किया गया। मंत्रालय ने कहा कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इथेनॉल का आविष्कार हमने नहीं किया था, जिसे एक सदी से भी पहले, हेनरी फोर्ड ने 'मॉडल टी' को इथेनॉल से चलाने के लिए डिज़ाइन किया था और ब्राज़ील एवं अमेरिका समेत दुनिया भर के देशों ने दशकों से इथेनॉल ब्लेंड का इस्तेमाल किया है।

मंत्रालय ने कहा कि उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम मौजूदा सरकार के समय शुरू नहीं हुआ था। इस पहल का एक लंबा संस्थागत इतिहास और कई अहम पड़ाव रहे हैं। उसने कहा कि भारत की इथेनॉल मिश्रण पहल की शुरुआत 2001 में प्रायोगिक परियोजनाओं से हुई थी और 2006 तक देश के कुछ हिस्सों में पांच फीसदी इथेनॉल मिश्रण लागू कर दिया गया था।

मंत्रालय ने बताया कि 2014 तक पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण लगभग 1.5 फीसदी पर ही था लेकिन 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति लागू होने और गन्ने के अलावा अन्य कच्चे माल को भी इसमें शामिल किए जाने के बाद सरकार इथेनॉल उत्पादन में तेजी लाई।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत ने निर्धारित समय से पहले 2022 में ही 10 फीसदी ईथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया। इसके बाद इथेनॉल उत्पादन संयंत्रों, भंडारण तथा लॉजिस्टिक्स में निवेश के बाद 2025-26 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष में 20 फीसदी मिश्रण का लक्ष्य भी प्राप्त कर लिया।

पुराने वाहनों को लेकर उठी चिंताओं पर मंत्रालय ने कहा कि ई20 को देशभर में लागू करने से पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, ईंधन प्रणाली, विभिन्न सामग्रियों के साथ अनुकूलता, जंग-रोधी क्षमता, वाहन संचालन और उत्सर्जन सहित अनेक पहलुओं पर व्यापक परीक्षण किए गए।

मंत्रालय ने कहा कि मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प सहित वाहन विनिर्माताओं से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार, वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग किए गए वाहनों में ई20 के कारण जंग लगने, असामान्य घिसाव या कलपुर्जों के जल्दी खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली है।

मंत्रालय ने पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 जैसे कई प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराने की मांग को भी खारिज करते हुए कहा कि पूरे देश में समानांतर आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी और एक लाख से अधिक खुदरा ईंधन केंद्रों पर वितरण व्यवस्था जटिल हो जाएगी।

कीमतों के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि ई20 जरूरी नहीं कि पारंपरिक पेट्रोल से सस्ता हो क्योंकि किसानों को समर्थन देने के लिए इथेनॉल की खरीद कीमत लाभकारी स्तर पर तय की जाती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने पर यह पेट्रोल से भी महंगा पड़ सकता है।

मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर कीमतें घटाना नहीं बल्कि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना, कीमतों में स्थिरता लाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

मंत्रालय के अनुसार 2014-15 के इथेनॉल आपूर्ति वर्ष से अब तक एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता लगभग 316 लाख टन कम हुई है, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करीब 952 लाख टन घटा और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से ई20 को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारी से प्रभावित नहीं होने की अपील करते हुए कहा कि इसे देशभर में लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों, तेल विपणन कंपनियों और नियामकों द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 23 जून, 2026 को एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए 'इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम' के बारे में गलत जानकारी को दूर करने और तथ्यों के आधार पर स्पष्टीकरण देने के लिए पहले ही एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर दिया था। वहीं, ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने भी 4 जुलाई, 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रोग्राम के बारे में स्पष्टीकरण जारी किए थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

Share this story