पश्चिम एशिया की जंग से पीई-वीसी निवेश पर पड़ा असर, मार्च में निवेश में आई 19 प्रतिशत की गिरावट

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पश्चिम एशिया की जंग से पीई-वीसी निवेश पर पड़ा असर, मार्च में निवेश में आई 19 प्रतिशत की गिरावट


नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला नकारात्मक असर अब साफ नजर आने लगा है। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण भारत में होने वाले निवेश पर काफी बुरा असर पड़ा है। मार्च के महीने में भारत में प्राइवेट इक्विटी (पीई) और वेंचर कैपिटल (वीसी) फर्मों में होने वाला निवेश करीब 19 प्रतिशत तक गिर गया है।

रिसर्च फर्म वेंचर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्म्स में होने वाले निवेश में मार्च के महीने में आई गिरावट की वजह से कैलेंडर ईयर 2026 की पहली तिमाही में कुल 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। साल की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के दौरान प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल का कुल निवेश 9.10 डॉलर रहा, जबकि साल 2025 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2025 के बीच प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्म में 11.7 अरब डॉलर का निवेश हुआ था।

अगर मार्च 2026 की बात करें तो इस महीने प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल का कुल निवेश 3.8 अरब डॉलर रहा। जबकि पिछले साल मार्च के महीने में दोनों का कुल निवेश 4.7 अरब डॉलर का था। इस तरह मार्च के महीने में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल के कुल निवेश में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इतना ही नहीं, साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान 10 करोड़ डॉलर या इससे अधिक राशि वाली बड़ी डील की संख्या में भी पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल जनवरी से मार्च की अवधि में 10 करोड़ डॉलर या इससे अधिक की 29 डील को फाइनल किया गया था। इस साल जनवरी से लेकर मार्च के बीच 10 करोड़ डॉलर या इससे अधिक की सिर्फ 17 डील को ही फाइनल किया जा सका।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण मार्केट सेंटिमेंट्स काफी कमजोर हो गए हैं। इसी वजह से बड़ी डील को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी कम हो गई है। इस लड़ाई की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में भी जबरदस्त तेजी आई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने का खतरा बन गया है। इसलिए वैश्विक स्तर पर तमाम स्टॉक मार्केट में भी बड़ी गिरावट आई है।

शेयर मार्केट में आई गिरावट का निगेटिव असर कंपनियों के वैल्यूएशंस पर पड़ा है। बाजार की कमजोरी के कारण ज्यादातर कंपनियों की वैल्यूएशन घट गई है। ऐसे में प्रमोटर्स को कम वैल्यूएशन पर डील करना घाटे का सौदा लग रहा है। फिलहाल प्रमोटर्स पूंजी जुटाने के लिए हालात सामान्य होने का इंतजार करना चाहते हैं।

टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि फरवरी के आखिरी दिन जंग शुरू हुई थी। एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद इसके खत्म होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमला और तेज करने की धमकी दी है, तो दूसरी ओर ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

दोनों पक्षों के अड़ियल रुख की वजह से युद्ध के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसकी वजह से शेयर बाजार के सेंटिमेंट्स पर भी बुरा असर पड़ रहा है। तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि जब तक यह अनिश्चितता खत्म नहीं होती, तब तक मार्केट सेंटिमेंट्स के सुधरने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। ऐसे अनिश्चित माहौल में निवेशक भी फिलहाल प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्म्स में निवेश नहीं करना चाहते।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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