यूपीआई लेनदेन पर उपयोगकर्ताओं से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा: वित्त मंत्रालय
- आम यूपीआई यूजर्स के लिए कोई शुल्क नहीं, व्यापारियों के लिए भी अधिकांश ट्रांजेक्शन रहेंगे मुफ्त
नई दिल्ली, 08 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने शनिवार को यूपीआई से पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स के बीच शुल्क को लेकर जारी भ्रम को दूर करते हुए सफाई दी है। सरकार ने यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच स्पष्ट किया है कि यूपीआई से भुगतान करने वाले आम उपभोक्ताओं से किसी भी तरह का ट्रांजेक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही व्यापारियों के लिए भी यूपीआई के अधिकांश लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
वित्त मंत्रालय ने जारी एक आधिकारिक बयान में कहा है कि आम यूपीआई यूजर्स के लिए लेन-देन पूरी तरह से निशुल्क रहेगा। ग्राहकों से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। भविष्य में यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू भी होता है, तो उसका भार केवल चुनिंदा बड़े व्यापारियों पर होगा, आम उपभोक्ताओं पर नहीं। मंत्रालय ने बतााया कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सभी यूपीआई ट्रांजेक्शन भी पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे। साथ ही, व्यापारियों के लिए भी यूपीआई के अधिकांश ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा है कि भविष्य में यदि व्यापारी छूट दर (एमडीआर) लागू की जाती है, तो ये केवल कुछ सीमित प्रकार के व्यापारी ट्रांजेक्शन पर, एक निश्चित सीमा से अधिक राशि होने की स्थिति में और बेहद मामूली दर पर लागू होगी। यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लिए जाने वाले शुल्क की तुलना में काफी कम होगी। सरकार ने ये कहा कि सभी व्यापारियों पर एक समान शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति यह तय करेगी कि एमडीआर लागू किया जाना है या नहीं और यदि लागू होता है तो उसकी दर क्या होगी।
मंत्रालय ने आगे स्पष्ट किया कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम (पीएसएस एक्ट) में हालिया संशोधन को लेकर कुछ गलत धारणाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों द्वारा इसे आम नागरिकों से यूपीआई शुल्क वसूलने की दिशा में कदम बताया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह संशोधन एक सक्षमकारी प्रावधान है, जिसका उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी विकास, वित्तीय समावेशन और उभरते जोखिमों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यदि किसी बाहरी दबाव का प्रभाव होता, तो भारत ने वर्ष 2016 में यूपीआई की शुरुआत नहीं की होती। वहीं, जनवरी 2020 से नागरिकों और व्यापारियों के लिए यूपीआई को निःशुल्क रखने की व्यवस्था भी लागू नहीं की जाती। सरकार के अनुसार, इन्हीं प्रयासों के कारण यूपीआई आज दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय में काम करने वाली परस्पर-संचालित भुगतान प्रणाली बन चुकी है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि यूपीआई से संबंधित नीतिगत बदलावों के पीछे किसी बाहरी प्रभाव या दबाव की भूमिका हो सकती है। सरकार ने इसे पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

