घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतों में नहीं हुआ कोई बदलाव: पेट्रोलियम मंत्रालय
नई दिल्ली, 01 जनवरी (हि.स)। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को मीडिया में आ रही खबरों के बाद यह स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमत में 111 रुपये की वृद्धि संबंधी खबरों के बाद मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण आया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमत बाजार द्वारा निर्धारित होती है और अंतरराष्ट्रीय मानकों से जुड़ी होती है। मंत्रालय ने कहा कि मीडिया में यह खबर आ रही है कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में 111 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस संदर्भ में यह ध्यान देने योग्य है कि व्यावसायिक एलपीजी की कीमतों में संशोधन वैश्विक एलपीजी कीमतों और संबंधित लागतों में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।
मंत्रालय ने बताया कि घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी की कीमतें नहीं बदली हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की प्रभावी कीमत, जिसकी लागत लगभग 950 रुपये है, जो दिल्ली में गैर-पीएमयूवाई घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 853 रुपये और प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) लाभार्थियों के लिए 553 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है। ये पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए प्रभावी कीमत में करीब 39 फीसदी की कमी को दर्शाता है, जो अगस्त 2023 में 903 रु से घटकर नवंबर 2025 में 553 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, सरकार ने पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर 300 रुपये की लक्षित सब्सिडी को प्रति वर्ष नौ बार तक रिफिल करने की मंजूरी दे दी है, जिसके लिए 12 हजार करोड़ रुपये का व्यय स्वीकृत किया गया है। यह उपाय घरों के लिए स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करने पर सरकार की कोशिश को दर्शाते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अंतरराष्ट्रीय एलपीजी की कीमतों में वृद्धि हुई और ये कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। वैश्विक मूल्य अस्थिरता से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए, लागत में हुई वृद्धि को घरेलू एलपीजी की कीमतों में शामिल नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस समस्या का समाधान करने और किफायती कीमतों पर घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने हाल ही में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

