एनएमडीसी ने डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स में विस्तार और डिजिटलाइजेशन पहलों की समीक्षा की

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एनएमडीसी ने डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स में विस्तार और डिजिटलाइजेशन पहलों की समीक्षा की


नई दिल्ली, 20 जून (हि.स)। एनएमडीसी लिमिटेड के वरिष्ठ प्रबंधन ने डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। इस दौरान इसके परिचालन दक्षता को मजबूत करने, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों की समीक्षा की गई।

इस्पात मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में बताया कि एनएमडीसी के प्रबंधन को डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स के इस दौरे से प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने का अवसर मिला, जो डोनीमलाई को भविष्य के लिए तैयार खनन परिसर में बदलने में मदद कर रही है। इसके साथ ही एनएमडीसी को भारत के सबसे बड़े और जिम्मेदार लौह अयस्क उत्पादक के रूप में सुस्थापित करती है।

मंत्रालय ने कहा कि इस अवसर पर एनएमडीसी के सीएमडी अमिताभ मुखर्जी ने कार्यपालक निदेशकों के साथ मिलकर हाल ही में विकसित बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें हाई-राइज टावर शामिल हैं, जो कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास के प्रति एनएमडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस दौरान प्रबंधन ने कुमारस्वामी खदान से 10 एमटीपीए और डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स से 17 एमटीपीए के उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से चल रही क्षमता-विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास की पहलों की समीक्षा की।

इस्पात मंत्रालय ने कहा कि इन पहलों से एनएमडीसी के 100 एमटीपीए खनन कंपनी बनने के विजन में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। प्रबंधन ने 35 फीसदी तक एफई युक्त लौह अयस्क, लौह अयस्क स्लाइम्स और निम्न श्रेणी के लौह-युक्त पदार्थों जैसे बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (बीएचजे) और बैंडेड हेमेटाइट क्वार्ट्जाइट (बीएचक्यू) के उपयोग के लिए पहलों की भी समीक्षा की। इसके अलावा कुमारस्वामी खदान में नई लागू की गई स्वचालित गेट प्रबंधन प्रणाली दौरे के दौरान समीक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु था।

उल्लेखनीय है कि बल्लारी जिले के संदूर तालुक में स्थित डोनीमलाई कॉम्प्लेक्स इस्पात मंत्रालय के तहत आने वाले एनएमडीसी लिमिटेड का एक प्रमुख लौह अयस्क खनन और प्रसंस्करण केंद्र है। इस कॉम्प्लेक्स का नाम उल्टी नाव के आकार की पहाड़ियों पर कन्नड़ भाषा के शब्दों (डोनी=नाव, मलाई=पहाड़ी) से पड़ा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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