आरआईएनएल भूमि ई-नीलामी के दूसरे चरण से 218 करोड़ रुपये मिले, अब तीसरे चरण की तैयारी

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आरआईएनएल भूमि ई-नीलामी के दूसरे चरण से 218 करोड़ रुपये मिले, अब तीसरे चरण की तैयारी


आरआईएनएल भूमि ई-नीलामी के दूसरे चरण से 218 करोड़ रुपये मिले, अब तीसरे चरण की तैयारी


नई दिल्ली, 04 नवंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) ने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के भूखंडों की ई-नीलामी का दूसरा चरण पूरा कर लिया है। इस नीलामी में 114 भूखंडों की बिक्री हुई है, जिससे कुल 218 करोड़ रुपये की सफल बोली राशि प्राप्त हुई। इन भूखंडों का कुल आरक्षित मूल्य 184.8 करोड़ रुपये था। सफल बोलियां कुल आरक्षित मूल्य से 17.96 फीसदी अधिक रहीं।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक दूसरे चरण में सबसे ऊंची सफल बोली 1,82,650 रुपये प्रति वर्ग गज दर्ज की गई है, जबकि किसी एक भूखंड के आरक्षित मूल्य की तुलना में सर्वाधिक प्रीमियम 67.65 फीसदी रहा। यह प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया और बाजार आधारित प्रभावी मूल्य निर्धारण को दर्शाता है।

पहले चरण में एनएलएमसी ने कुल 150 भूखंडों की सफलतापूर्वक नीलामी की थी, जिससे कुल 366.33 करोड़ रुपये की सफल बोली राशि प्राप्त हुई थी। इन भूखंडों का कुल आरक्षित मूल्य 312.48 करोड़ रुपये था। सफल बोलियां आरक्षित मूल्य से औसतन 17.23 फीसदी अधिक रहीं। इस दौरान नीलामी की सबसे ऊंची कीमत 1.80 लाख रुपये प्रति वर्ग गज से अधिक रही।

मंत्रालय ने कहा कि ई-नीलामी के दोनों चरणों के पूरा होने के साथ ही कुल 264 भूखंडों की सफलतापूर्वक नीलामी की जा चुकी है। इनसे कुल 584.33 करोड़ रुपये की सफल बोली राशि प्राप्त हुई है, जबकि इनका संयुक्त आरक्षित मूल्य 497.29 करोड़ रुपये था। 12 अक्टूबर और 3 नवंबर को एक महीने के भीतर ई-नीलामी के दोनों चरण सफलतापूर्वक संपन्न होने से एनएलएमसी के लिए महत्वपूर्ण परिचालन मानक स्थापित हुए हैं। इससे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) और सरकारी संस्थाओं की अधिशेष भूमि तथा अन्य अचल परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से जुड़े इसी प्रकार के लेन-देन संचालित करने की उसकी क्षमता और मजबूत हुई है।

राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, जो वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करती है। यह केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) और अन्य सरकारी संस्थाओं के पास उपलब्ध अधिशेष भूमि एवं भवन परिसंपत्तियों की पहचान, मूल्यांकन, तैयारी और मौद्रीकरण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, पारदर्शी तथा बाजारोन्मुख तरीकों से सुगम बनाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

Livevns.news Desk
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