निर्यात आधारित औद्योगिक समूहों को फिर से मजबूत करने के प्रयास तेज
नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स)। केंद्र सरकार ने निर्यात आधारित औद्योगिक समूहों को फिर से मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसलिए निर्यात उन्मुख औद्योगिक समूहों के साथ बैठक में क्षमताओं को बढ़ाने और निर्यात बाजारों में अधिक भागीदारी को सक्षम बनाने पर बल दिया गया।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) ने निर्यात उन्मुख औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार पर हितधारकों के साथ वाणिज्य भवन में एक परामर्श बैठक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया की अध्यक्षता में की।
बैठक में हितधारकों ने बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी अपनाने और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए समग्र क्लस्टर पुनरुद्धार का आह्वान किया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक बैठक में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को क्लस्टर विकास प्रयासों के केंद्र में रखने पर व्यापक सहमति बनी, जिसमें वित्त तक पहुंच में सुधार, क्षमताओं को बढ़ाने और निर्यात बाजारों में अधिक भागीदारी को सक्षम बनाने पर बल दिया गया। वैश्विक मांग के रुझानों के साथ क्लस्टर विकास को संरेखित करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
मंत्रालय ने बताया कि इस परामर्श बैठक ने उद्योग और सरकार के बीच रचनात्मक संवाद के लिए एक मंच प्रदान किया। औद्योगिक क्लस्टर पुनरुद्धार पर बजट घोषणा के कार्यान्वयन में सहयोग के लिए व्यावहारिक अनुशंसाओं को साझा करने में सहायता भी प्रदान की। ये बैठक बजट प्राथमिकताओं को जमीनी कार्रवाई में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चर्चा का मार्गदर्शन एनआईसीडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने किया, जिन्होंने क्लस्टर विकास ढांचे को परिष्कृत और कार्यान्वित करने के लिए हितधारकों की निरंतर भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।
मंत्रालय के मुताबिक यह परामर्श बैठक आर्थिक विकास को बनाए रखने और मजबूत करने विषय पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनार के अनुवर्ती कार्रवाई के रूप में बुलाई गई थी, जिसका उद्देश्य क्लस्टर पुनर्जीवन पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाना और उद्योग जगत की निरंतर भागीदारी के माध्यम से बजट घोषणाओं को व्यावहारिक रणनीतियों में बदलना था। इस बैठक में निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी), उद्योग संघों, वित्तीय संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और सरकारी हितधारकों के प्रतिनिधियों ने व्यापक भागीदारी दिखाई।
इस परामर्श बैठक में एसोचैम, फिक्की, सीआईआई, पीएचडीसीसीआई, नैसकॉम, सिडबी, सीएसआईआर, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी), इंडियन डेयरी एसोसिएशन, अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी), ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए), इंडियन मशीन टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएमटीएमए), इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमैन, वेयरहाउसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स सहित कई प्रमुख उद्योग निकायों और संस्थानों ने भाग लिया। रिलायंस, टाटा केमिकल्स, रिलैक्सो, ब्यूमर ग्रुप और जेएलएल जैसी कंपनियों और कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों के साथ-साथ क्षेत्र-विशिष्ट संघों ने भी परामर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

