सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च हुआ एडविट ज्वेल्स का आईपीओ, एक जुलाई को हो सकती है लिस्टिंग

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सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च हुआ एडविट ज्वेल्स का आईपीओ, एक जुलाई को हो सकती है लिस्टिंग


नई दिल्ली, 23 जून (हि.स.)। रामभजो ब्रांड से ज्वेलरी का उत्पादन करने वाली कंपनी एडविट ज्वेल्स का 165.16 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में 25 जून तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 29 जून को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 30 जून को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर एक जुलाई को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं।

इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 130 रुपये से लेकर 138 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 100 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम 1 लॉट यानी 100 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 13,800 रुपये का निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर 1,93,200 रुपये के निवेश से अधिकतम 14 लॉट में 1,400 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 1,19,68,000 नए शेयर बेचे जा रहे हैं।

इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 49.98 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35.01 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 15.01 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए होलानी कंसलटेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।

एडविट ज्वेल्स की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 10.39 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 14.71 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 25.37 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 25.44 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 46.60 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 69.45 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 124.94 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 123.80 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 5.84 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 19.70 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 74.80 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 64.92 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 18.08 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़कर 32.80 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ 58.13 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 83.65 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी इस अवधि में बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 18.07 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 32.79 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 58.12 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 51.64 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 12.77 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 18.95 करोड़ रुपये और 2024-25 में 37.15 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 36.68 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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