नए आयकर अधिनियम एक अप्रैल से होंगे लागू, सीबीडीटी ने अधिसूचना जारी की

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नए आयकर अधिनियम एक अप्रैल से होंगे लागू, सीबीडीटी ने अधिसूचना जारी की


नई दिल्ली, 20 मार्च (हि.स)। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को आयकर अधिनियम, 2025 के लिए नियमों को अधिसूचित कर दिया है। एक अप्रैल से लागू होने वाले नए 'आयकर अधिनियम, 2025' के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रभावी होंगे। आयकर नियम, 2026 उस सरल प्रत्यक्ष कर कानून को लागू करेंगे, जिसे पिछले साल संसद ने मंजूरी दी थी।

नए आयकर अधिनियम नियमों में वेतनभोगियों के लिए मकान किराया भत्ते पर बढ़े हुए कर लाभ का प्रावधान है, लेकिन मकान मालिक-किरायेदार के संबंधों का खुलासा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया कानून 64 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा, जिसका उद्देश्य कराधान को सरल बनाना और विवादों को कम करना है। यह एक अप्रैल से प्रभावी होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि इन नियमों को आयकर नियम, 2026 कहा जा सकता है।

अधिसूचना के मुताबिक इस अधिनियम ने अनावश्यक प्रावधानों और पुरानी भाषा को हटा दिया गया है। आयकर अधिनियम, 1961 की 819 धाराओं को घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी है। नए आयकर विधेयक में शब्दों की संख्या 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख कर दी गई है, और स्पष्टता बढ़ाने के लिए 1961 के कानून के बोझिल पाठ के स्थान पर पहली बार 39 नई तालिकाएं और 40 नए सूत्र पेश किए गए हैं।संसद ने 12 अगस्त, 2025 को छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को बदलने के लिए एक नया आयकर विधेयक पारित किया था। यह कोई नई कर दर लागू नहीं करता है, बल्कि केवल भाषा को सरल बनाता है। जटिल आयकर कानूनों को समझने के लिए ऐसा करना आवश्यक था।

नए आयकर नियमों में पूंजीगत लाभ, शेयर बाजार के लेनदेन और अनिवासी कराधान के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, जबकि अन्य खुलासा प्रणाली को सरल बनाया गया है। अधिसूचना में 150 से अधिक आधिकारिक फॉर्म पेश किए गए हैं। आयकर नियम वेतनभोगी करदाताओं पर लागू होने वाले मकान किराया भत्ता (एचआरए) छूट के लिए प्रस्तावित ढांचे को बरकरार रखते हैं। नए नियमों के तहत मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु वेतन के 50 फीसदी की उच्च छूट सीमा के लिए पात्र होंगे, जबकि अन्य सभी स्थान 40 प्रतिशत पर बने रहेंगे।

इस समय मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में वेतनभोगी कर्मचारी अपने वेतन के 50 फीसदी तक एचआरए छूट का दावा कर सकते है, जबकि अन्य स्थानों पर रहने वाले 40 फीसदी की निचली सीमा के लिए पात्र हैं। नए नियमों के तहत आयकर कटौती का दावा करने के लिए किरायेदार-मकान मालिक के संबंधों के बारे में जानकारी देना जरूरी है और इसमें विदेशी इनकम पर टैक्स क्रेडिट दावों के लिए लेखा परीक्षकों और कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। इसके अलावा इसमें पैन के दोहरीकरण और प्रतिकूल ऑडिट टिप्पणी से पैदा होने वाली कर देनदारी की जांच के लिए लेखा परीक्षकों को अधिक जिम्मेदारी दी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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