केंद्र ने कोयला क्षेत्र में व्यापार में आसानी को बढ़ाने के लिए बीमा शुरिटी बॉन्ड के उपयोग को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स)। केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाने के लिए आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए निष्पादन बैंक गारंटी (पीबीजी) के स्थान पर बीमा शुरिटी बांड (आईएसबी) के उपयोग की अनुमति दे दी है। कोयला मंत्रालय ने एमएमडीआर कोयला ब्लॉकों के लिए बीमा शुरिटी बांड की स्वीकृति को अधिसूचित किया है।
कोयला मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि कोयला ब्लॉक आवंटियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करने और कोयला क्षेत्र में व्यापार करने की सुगमता को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण सुधार किया है। मंत्रालय ने कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम, 2026 के जरिये मंत्रालय ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए निष्पादन बैंक गारंटी (पीबीजी) के स्थान पर बीमा शुरिटी बांड (आईएसबी) के उपयोग की अनुमति प्रदान की है।
कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम, 2026 को 22 जून, 2026 की अधिसूचना जीएसआर 508(ई) के माध्यम से भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया है और इसे वेब लिंक https://egazette.gov.in/(S(lymuax4zcvs2ntquyuz4zhzb))/ViewPDF.aspx पर देखा जा सकता है। बीमा शुरिटी बांड की सुविधा शुरू में एमएमडीआर अधिनियम के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए पेश की जाएगी। मंत्रालय कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए भी इस प्रावधान का विस्तार करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
मंत्रालय के मुताबिक संशोधित व्यवस्था के तहत कोयला ब्लॉक आवंटियों को अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी बाध्यता पूरी करने के लिए निष्पादन बैंक गारंटी अथवा बीमा शुरिटी बांड इनमें में से किसी एक का विकल्प चुनने की सुविधा दी गई है। यह सुविधा वर्तमान आवंटियों पर भी लागू होगी, जिससे वे निर्धारित शर्तों के अनुसार पहले से जमा कराई गई निष्पादन बैंक गारंटी को बीमा शुरिटी बांड से प्रतिस्थापित कर सकेंगे।
इस कदम से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े वित्तीय बोझ में कमी आने की उम्मीद है तथा कोयला ब्लॉक आवंटी अपने पूंजागत संसाधनों का उपयोग खदान विकास और परिचालन गतिविधियों में अधिक दक्षता से कर सकेंगे। साथ ही, इससे वित्तीय साधनों तक उनकी पहुंच बेहतर होगी, जबकि उपयुक्त निष्पादन सुरक्षा तंत्र के माध्यम से सरकार के हित भी पूर्णतः सुरक्षित रहेंगे।
यह पहल कोयला मंत्रालय के उन नियामक सुधारों पर निरंतर ध्यान को दर्शाती है, जो निवेश को प्रोत्साहित करते हैं, कोयला ब्लॉकों के समयबद्ध परिचालन का समर्थन करते हैं और देश में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए एक अधिक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल इकोकसिस्टम का निर्माण करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

