बीसीजीसीएल और एमसीएल ने 'कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट' परियोजना के लिए किया ऐतिहासिक भूमि पट्टा समझौता
नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स)। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) ने ओडिशा के लखनपुर में कोल टू अमोनियम नाइट्रेट परियोजना के लिए ऐतिहासिक भूमि पट्टा समझौता किया है।
कोयला मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक बयान में बताया कि भारत के कोयला गैसीकरण रोडमैप को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में बीसीजीसीएल और एमसीएल के बीच ओडिशा के लखनपुर में प्रस्तावित कोल टू अमोनियम नाइट्रेट परियोजना के लिए एक ऐतिहासिक भूमि पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ये हस्ताक्षर समारोह आज नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
मंत्रालय के मुताबिक यह परियोजना, 2000 टीपीडी अमोनियम नाइट्रेट सुविधा के रूप में परिकल्पित एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि यह भारत की पहली कोयला गैसीकरण परियोजना है, जिसमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) द्वारा विकसित स्वदेशी गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह ऊर्जा और रसायन क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार, तकनीकी प्रगति और आयातित तकनीकों पर निर्भरता में कमी की दिशा में एक निर्णायक कदम को दर्शाता है।
कोयला मंत्रालय ने कहा कि लगभग 350 एकड़ भूमि में फैली यह परियोजना, जो एमसीएल के अधीन है, कोयला मंत्रालय के हालिया प्रगतिशील नीतिगत सुधारों के माध्यम से संभव हुई है। ये सुधार कोल बेयरिंग एरिया (सीबीए) भूमि के उपयोग को कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए सक्षम बनाते हैं, जिससे भारत के प्रचुर कोयला संसाधनों के मूल्य संवर्धित उपयोग के नए मार्ग खुलते हैं और क्षेत्र के विविधीकरण को मजबूती मिलती है।
उल्लेखनीय है कि इस भूमि पट्टा समझौते से परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी आने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर इसके पूर्ण होने की संभावना है। लखनपुर में कोल टू अमोनियम नाइट्रेट परियोजना एक महत्वपूर्ण औद्योगिक पहल है, जो तकनीकी प्रगति, नीतिगत सुधारों तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को परिलक्षित करती है तथा दीर्घकालिक औद्योगिक विकास और आर्थिक सुदृढ़ता में योगदान देगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

