एआई के डर से आईटी सेक्टर में कोहराम, 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट

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एआई के डर से आईटी सेक्टर में कोहराम, 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट


नई दिल्ली, 24 फरवरी (हि.स.)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण बनी चिंता की वजह से डोमेस्टिक से लेकर ग्लोबल स्टॉक मार्केट तक में आईटी सेक्टर आज एक बार फिर बड़ी बिकवाली का शिकार हो गया। साल 2026 में फरवरी का महीना आईटी कंपनियां के लिए काफी भारी साबित होता हुआ नजर आ रहा है। इस महीने निफ्टी का आईटी इंडेक्स 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का शिकार हो चुका है।

फरवरी, 2026 में आईटी सेक्टर में आई गिरावट सितंबर 2008 में आई गिरावट के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट बनती हुई नजर आ रही है। सितंबर 2008 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक संकट (मंदी) की शुरुआत हुई थी, जिसका असर दूसरे सेक्टर्स के साथ ही आईटी सेक्टर पर भी पड़ा था, लेकिन 2026 में आईटी सेक्टर में आई है गिरावट की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण आईटी सेक्टर पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर का डर है। इस डर की वजह से आईटी इंडेक्स में शामिल सभी 10 कंपनियों के शेयर 10 प्रतिशत से अधिक टूट चुके हैं। इन 10 कंपनियों में से छह कंपनियों के शेयर अभी तक 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का शिकार हो चुके हैं।

निफ्टी के आईटी इंडेक्स में शामिल कंपनियों में कोफोर्ज का प्रदर्शन सबसे अधिक खराब रहा है। 2026 की शुरुआत से लेकर अभी तक यह शेयर लगभग 25 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का शिकार हो चुका है। इसके पहले 2022 में भी यह शेयर 35 प्रतिशत टूट गया था। इसी तरह आईटी इंडेक्स में शामिल कंपनी विप्रो खराब प्रदर्शन करने के मामले में दूसरे स्थान पर रही है। इस साल विप्रो के शेयर 23.50 प्रतिशत टूट चुके हैं। 2022 के बाद विप्रो के शेयरों का ये दूसरा सबसे निराशाजनक प्रदर्शन है। 2022 में विप्रो के शेयरों में 45 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई थी।

इसके अलावा आईटी सेक्टर की एक और कंपनी परसिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर भी इस साल के पहले दो महीनों में अभी तक 23.50 प्रतिशत तक लुढ़क चुके हैं। इसके पहले इस कंपनी के शेयरों में इतनी ही गिरावट 2011 में दर्ज की गई थी। इसी तरह आईटी सेक्टर की एक और कंपनी एलटीआई माइंडट्री के शेयर इस साल अभी तक 22.50 प्रतिशत तक लुढ़क चुके हैं। इससे पहले साल 2022 में कंपनी के शेयर 40 प्रतिशत तक की गिरावट का शिकार हुए थे। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी इंफोसिस के शेयर इस साल अभी तक 20 प्रतिशत तक गिर चुके हैं। 2008 के बाद इंफोसिसेस के शेयरों के लिए ये सबसे खराब साल माना जा रहा है। 2008 में कंपनी के शेयर 37 प्रतिशत तक टूट गए थे।

आईटी इंडेक्स में शामिल दूसरी कंपनियों की बात करें, तो एम्फैसिस के शेयर भी इस साल अभी तक 20 प्रतिशत की गिरावट का शिकार हो गए हैं, जबकि टीसीएस के शेयरों में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा एचसीएल टेक्नोलॉजी के शेयरों में इस साल 16 प्रतिशत की कमजोरी आ चुकी है। ऑरेकल फाइनेंशियल के शेयरों में 15 प्रतिशत और टेक महिंद्रा के शेयरों में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

इस साल के पहले 2 महीने के दौरान जबरदस्त गिरावट का शिकार होने के बावजूद ज्यादातर मार्केट एनालिस्ट आईटी सेक्टर की कंपनियां के शेयरों के लिए बाई (खरीद) की कॉल दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इन शेयरों में लॉन्ग टर्म में 22 से 50 प्रतिशत से अधिक की तेजी आ सकती है। हालांकि निवेशकों को मार्केट की स्थिति और कंपनी के शेयरों की चाल का विश्लेषण करने के बाद ही कोई भी सौदा करने का फैसला करना चाहिए।

धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चिंताओं, वैल्यूएशन और डी-रेटिंग ने आईटी सेक्टर पर दबाव बना दिया है। फिलहाल इन्वेस्टर्स की नजर इस बात पर टिकी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चिंताएं आने वाले दिनों में एक्चुअल रेवेन्यू अर्निंग पर कितना असर डालती हैं। इन्वेस्टर्स इस बात को भी परखना चाह रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चिंताएं कहीं ओवर रिएक्शन न साबित हो जाएं। हालांकि, इन्वेस्टर्स की इसी सतर्कता के कारण फिलहाल आईटी सेक्टर बड़ी गिरावट का शिकार होता हुआ नजर आ रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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