प्रसोल केमिकल्स ने कमजोर लिस्टिंग से किया निराश, नुकसान में आईपीओ निवेशक

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प्रसोल केमिकल्स ने कमजोर लिस्टिंग से किया निराश, नुकसान में आईपीओ निवेशक


नई दिल्ली, 16 सितंबर (हि.स.)। फॉस्फोरस और एसिटोन बेस्ड स्पेशिलिटी केमिकल का प्रोडक्शन करने वाली कंपनी प्रसोल केमिकल्स लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में गिरावट के साथ एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 676 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 9.62 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 611 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग 9.76 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 610 रुपये के स्तर पर हुई।

कमजोर लिस्टिंग के बाद खरीदारों ने लिवाली शुरू कर दी, जिससे इस शेयर की स्थिति में सुधार होने लगा। लगातार हो रही खरीदीरी के सपोर्ट से ये शेयर उछल कर 667.15 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि इसके बाद इसकी चाल में मामूली गिरावट आ गई। बाजार में लगातार जारी खरीद बिक्री के बीच सुबह 11:15 बजे तक का कारोबार होने के बाद ये शेयर 660 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इस तरह अभी तक के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशक प्रति शेयर 16 रुपये यानी 2.37 प्रतिशत के नुकसान में थे।

इस कंपनी का 500 करोड़ रुपये का आईपीओ 8 से 10 सितंबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से एवरेज रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 3.47 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 7.59 गुना (एक्स एंकर) सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 1.89 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 1.79 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत दो रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 73,96,437 शेयर जारी किए गए हैं। इनमें लगभग 80 करोड़ रुपये के 11,83,431 नए शेयर जारी किए गए हैं, जबकि लगभग 420 करोड़ रुपये के 62,13,006 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, आईपीओ से जुड़े खर्चों की भरपाई करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

प्रसोल केमिकल्स लिमिटेड की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 18.13 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 43.57 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ उछल कर 83.12 करोड़ रुपये हो गया।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 887.56 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 1,015.54 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 1,237.85 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में भी लगातार बढ़ोतरी होती रही। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 82.07 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 101.05 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ उछल कर 110.06 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 314.24 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 355.87 करोड़ रुपये के स्तर पर और 2025-26 में 436.91 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 325.84 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 367.46 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 448.51 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 60.53 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 87.77 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 139.32 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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