मनिका प्लास्टेक से निवेशक हुए निराश, फ्लैट लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट

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मनिका प्लास्टेक से निवेशक हुए निराश, फ्लैट लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट


नई दिल्ली, 21 सितंबर (हि.स.)। बैटरी केसिंग्स, पेंट बकेट्स और थिनवॉल कंटेनर जैसी रिजिड पॉलिमर पैकेजिंग का निर्माण करने वाली कंपनी मनिका प्लास्टेक लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में फ्लैट एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 43 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग बिना किसी बदलाव के 43 रुपये के स्तर पर ही हुई।

फ्लैट लिस्टिंग से निराश निवेशकों को और झटका तब लगा, जब इस शेयर की बिकवाली शुरू हो गई। बिकवाली के दबाव में थोड़ी देर में ही ये शेयर फिसल कर 40.85 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर पहुंच गया। इस तरह पहले दिन के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 2.15 रुपये यानी पांच प्रतिशत का नुकसान हो गया।

इस कंपनी का 125.50 करोड़ रुपये का आईपीओ 11 से 16 सितंबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 29.46 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 11.22 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 66.58 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 23.98 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत 2 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 2,91,86,045 शेयर जारी किए गए हैं। इनमें लगभग 92 करोड़ रुपये के 2,15,11,627 नए शेयर जारी किए गए हैं, जबकि लगभग 33 करोड़ रुपये के 76,74,418 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी प्लांट और नई मशीनरी खरीदने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, आईपीओ से जुड़े खर्चों की भरपाई करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

मनिका प्लास्टेक की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 11.53 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 19.33 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 22.40 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 13.07 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 368.76 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 412.59 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 437.26 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 162.71 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका था।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 93.06 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 97.45 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ कम होकर 88.19 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 92.46 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा हुआ था।

कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 88.05 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 105.29 करोड़ रुपये के स्तर पर और 2025-26 में 127.69 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक की बात करें, तो इस दौरान कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 136.97 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 107.99 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 125.17 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 147.62 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी का नेटवर्थ 156.78 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 30.86 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 45.30 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 58.14 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी का ईबीआईटीडीए 24.38 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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