भारत-जीसीसी की एफटीए पर बातचीत शुरू करने के लिए नियम-शर्तों पर हुए हस्ताक्षर

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भारत-जीसीसी की एफटीए पर बातचीत शुरू करने के लिए नियम-शर्तों पर हुए हस्ताक्षर


भारत-जीसीसी की एफटीए पर बातचीत शुरू करने के लिए नियम-शर्तों पर हुए हस्ताक्षर


भारत-जीसीसी की एफटीए पर बातचीत शुरू करने के लिए नियम-शर्तों पर हुए हस्ताक्षर


-भारत-खाड़ी सहयोग परिषद देशों ने मुक्त व्यापार समझौता के लिए शुरुआती शर्तों पर किए हस्‍ताक्षर

नई दिल्‍ली, 05 फरवरी (हि.स)। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्‍यापार समझौता के बाद भारत पश्चिमी एशियाई देशों के समूह खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर आगे बढ़ रहा है। भारत-जीसीसी ने मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने के लिए संदर्भ की शर्तें (टीओआर) पर गुरुवार को हस्ताक्षर कर दिए हैं।

केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पश्चिमी एशियाई देशों के समूह खाड़ी सहयोग परिषद के साथ वार्ता को लेकर नियम एवं शर्तों पर हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता की। टीओआर में नियम एवं शर्तों में प्रस्तावित व्यापार समझौते का दायरा और तौर-तरीके बताए गए हैं। गोयल ने बताया कि हमारे मुख्य वार्ताकार द्वारा भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के बीच एफटीए के लिए संदर्भ की शर्तें पर हस्‍ताक्षर होते देखकर बहुत खुशी हुई। उन्‍होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि करीब एक करोड़ भारतीय जीसीसी क्षेत्र में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।

वाणिज्‍य मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी के नेतृत्व में 6 देशों वाले सीजीसी (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) के साथ हमारे संबंध एक रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं और नए और बड़े आयामों तक पहुंच गए हैं। भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मई, 2022 में पहले ही लागू किया था। इसके बाद भारत और ओमान ने 18 दिसंबर, 2025 को मस्कट में एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए थे। अब जीसीसी के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर एक तरह से बातचीत फिर से शुरू हो रही है।

उल्‍लेखनीय है कि जीसीसी, खाड़ी क्षेत्र के छह देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन का समूह है। इससे पहले दो दौर की बातचीत 2006 और 2008 में हुई थी। जीसीसी द्वारा सभी देशों और आर्थिक समूहों के साथ वार्ता स्थगित करने के कारण तीसरे दौर की वार्ता नहीं हो पाई थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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