एक महीने में दूसरी बार एचएसबीसी ने इंडियन इक्विटीज की रेटिंग घटाई

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एक महीने में दूसरी बार एचएसबीसी ने इंडियन इक्विटीज की रेटिंग घटाई


- एचएसबीसी ने 31 मार्च को भारत की रेटिंग ओवरवेट से घटाकर की थी न्यूट्रल

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (हि.स.)। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने एक बार फिर इंडियन इक्विटीज की रेटिंग को घटा कर घरेलू शेयर बाजार और उसके निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने इंडियन इक्विटीज की रेटिंग को न्यूट्रल से घटा कर अंडरवेट कर दिया है। एक महीने से भी कम अवधि में एचएसबीसी ने दूसरी बार इंडियन इक्विटीज की रेटिंग घटाई है। इसके पहले 31 मार्च को इंडियन इक्विटीज की रेटिंग ओवरवेट से घटा कर न्यूट्रल की गई थी और अब इसे न्यूट्रल से अंडरवेट कर दिया गया है।

एचएसबीसी का कहना है कि पश्चिम एशिया में बने तनाव के हालात और उसकी वजह से कच्चे तेल की कीमत में लगातार आ रही तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। ब्रोकरेज फर्म की और से जारी किए गए एक नोट में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग की वजह से पेट्रोलियम उत्पादों की तेजी से बढ़ रही कीमत भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

अमेरिका और इजरायल तथा ईरान के बीच 28 फरवरी को जंग की शुरुआत हुई थी। इस जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 40 प्रतिशत से भी अधिक की तेजी आ चुकी है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी के कारण भारत जैसे उन तमाम देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा बन गया है जो अपनी जरूरत पूरा करने के लिए आयत का सहारा लेते हैं।

एचएसबीसी के नोट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से भारत में उत्तर पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में निवेश के लिए आकर्षण कम हो गया है। इसी वजह से जंग शुरू होने के बाद से लेकर अभी तक निफ्टी 6.7 प्रतिशत और सेंसेक्स 7.9 प्रतिशत तक की गिरावट का शिकार होकर दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजार की सूची में शामिल हो चुके हैं।

ब्रोकरेज फर्म ने घरेलू बाजार में गिरावट की चर्चा करते हुए विदेशी निवेशकों की चिंता का भी जिक्र किया है। इसमें भारतीय मुद्रा रुपये की कीमत में आ रही गिरावट का उल्लेख भी किया गया है। नोट में कहा गया है कि अगर भारतीय सॉफ्टवेयर सर्विसेज पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के असर से होने वाले नकारात्मक असर में इजाफा होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो भारतीय मुद्रा में और अधिक गिरावट का होने की आशंका जताई जा सकती है। इसी वजह से विदेशी निवेशक इस साल लगातार भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर अपना पैसा निकालने में लगे हुए हैं। 2026 में अभी तक विदेशी निवेशक 18.5 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच चुके हैं।

एचएसबीसी का अनुमान है कि जून और सितंबर की तिमाही में भी ज्यादातर समय कच्चे तेल और गैस की तंगी बनी रहेगी। इस वजह से भारत के अर्निंग ग्रोथ में 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बाद बनी परिस्थितियों में डोमेस्टिक इक्विटी वैल्युएशंस भी अपने ऊपरी स्तर से नीचे गिर चुके हैं। हालांकि, जैसे-जैसे कमाई के अनुमानों में कटौती की खबर सामने आएगी, वैसे-वैसे इक्विटी वैल्युएशंस की स्थिति में भी परिवर्तन होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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