गोयल ने लिकटेंस्टीन की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए किया आमंत्रित

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गोयल ने लिकटेंस्टीन की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए किया आमंत्रित


गोयल ने लिकटेंस्टीन की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए किया आमंत्रित


गोयल ने लिकटेंस्टीन की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए किया आमंत्रित


गोयल ने लिकटेंस्टीन की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए किया आमंत्रित


नई दिल्‍ली, 07 जनवरी (हि.स)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करने के साथ भारत–ईएफटीए व्यापार समझौते का लाभ उठाकर अपनी मौजूदगी बढ़ाने का भी आह्वान किया।

लिकटेंस्टीन की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे केंद्रीय वाणिज्‍य मंत्री पीयूष गोयल ने यहां की जानी-मानी कंपनियों के लीडर्स के साथ एक बिजनेस राउंडटेबल बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्‍होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इंडिया-ईएफटीए टीईपीए केवल एक व्‍यापार समझौता नहीं है, बल्कि ये निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, स्किल डेवलपमेंट और मजबूत वैल्यू चेन को बढ़ावा देने का एक फ्रेमवर्क है।

उन्‍होंने कहा कि भारत बड़े पैमाने के अवसर, सुधारों की तेज रफ्तार, तेजी से बढ़ता हुआ उपभोक्ता बाजार, मजबूत औद्योगिक आधार और कारोबारी सुगमता, डिजिटलीकरण तथा बुनियादी ढांचे के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता की पेशकश करता है। उन्होंने लिकटेंस्टीन की कंपनियों से आग्रह किया कि वे इस समझौते को भारत में विनिर्माण और नवाचार में साझेदारियां विकसित करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में उभरते अवसरों में भागीदारी के मंच के रूप में उपयोग करें।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने जारी एक बयान में कहा कि केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री ने ईएफटीए कंपनियों से भारत में प्रमुख व्यापार एवं निवेश आयोजनों में अधिक भागीदारी का भी आग्रह किया। मंत्रालय के मुताबिक दोनों पक्षों ने वैश्विक कारोबारी माहौल पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान, अनिश्चितता एवं बढ़ती अस्थिरता के बीच दोनों देश मिलकर निवेशकों और उद्यमों को स्थिरता तथा पहले से अनुमान लगाने की क्षमता प्रदान कर सकते हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘भारत का विशाल आकार, प्रतिभा और विनिर्माण क्षमता लिश्टेंस्टाइन की विशिष्ट औद्योगिक विशेषज्ञता, उच्च-मूल्य नवाचार और वित्तीय दक्षता के साथ पूरक बन सकती है। दोनों देश मिलकर मजबूत मूल्य शृंखलाएं और भरोसेमंद निवेश का एक पुल तैयार कर सकते हैं।’

उल्‍लेखनीय है कि भारत और चार यूरोपीय देशों के समूह यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच मुक्त व्यापार समझौता पिछले वर्ष लागू हुआ था। ईएफटीए के सदस्यों में आइसलैंड, लिश्टेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। इस समझौते के तहत भारत को अगले 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता मिली है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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