पश्चिम एशिया के हालात को देखते सरकार निर्यातकों के लिए लाई ‘रिलिफ’ योजना
नई दिल्ली, 19 मार्च (हि.स.)। सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच पैदा हो रही निर्यात बाधाओं को देखते हुए रिलिफ (निर्यात सुविधा हेतु लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप) योजना को मंजूरी दी है। रिलिफ संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, इज़राइल, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान और यमन जैसे क्षेत्रीय देशों को भेजे जाने वाले माल को कवर करेगी। इसमें डिलीवरी और ट्रांसशिपमेंट शामिल है।
योजना के तहत तीन लाभ दिए गए हैं। पहला कि कंसाइनमेंट्स के लिए ईसीजीसी क्रेडिट इंश्योरेंस कवर रखने वालों को कवर के अलावा 100 प्रतिशत तक का रिस्क कवरेज मिलेगा। इसकी अवधि 14 फरवरी से 15 मार्च है। इससे बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
दूसरा अगले तीन महीनों (16 मार्च से 15 जून तक) तक निर्यात कंसाइनमेंट्स की योजना बना रहे निर्यातकों को सरकार के सहयोग से 95 प्रतिशत तक के रिस्क कवरेज वाला ईसीजीसी कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे निर्यातकों का आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलेगी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद शिपमेंट का प्रवाह जारी रहेगा।
तीसरा कुछ एमएसएमई निर्यातक क्रेडिट इंश्योरेंस (14 फरवरी से 15 मार्च तक) का लाभ नहीं उठा पाए लेकिन वे माल ढुलाई और इंश्योरेंस सरचार्ज के भारी बोझ का सामना कर रहे हैं। ऐसे निर्यातकों को राहत पैकेज में योग्य, गैर-बीमित निर्यातकों के लिए आंशिक रीइम्बर्समेंट (50 प्रतिशत तक) की व्यवस्था शामिल है। यह सहायता निर्धारित शर्तों, दस्तावेज़ों के सत्यापन और अधिसूचित सीमाओं (प्रति एक्सपोर्टर 50 लाख रुपये तक) के अधीन दी जाएगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार रिलिफ पहल का उद्देश्य खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में व्यवधानों से उत्पन्न असाधारण माल ढुलाई लागत में वृद्धि, बढ़े हुए बीमा प्रीमियम और युद्ध संबंधी निर्यात जोखिमों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है।
निर्यात प्रोत्साहन मिशन के अंतर्गत राहत कार्य के लिए 497 करोड़ रुपये का स्वीकृत वित्तीय आवंटन किया गया है। ईसीजीसी दावों और निधि उपयोग की वास्तविक समय में निगरानी के लिए डैशबोर्ड आधारित निगरानी प्रणाली बनाए रखेगा। ईपीएम संचालन समिति बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के आलोक में हस्तक्षेप के संचालन की समय-समय पर समीक्षा करेगी और आवश्यकतानुसार इसमें संशोधन, निरंतरता या इसे वापस लेने की सिफारिश कर सकती है।
सरकार का कहना है कि संकट की स्थिति से निपटने के लिए समन्वित प्रतिक्रिया के तहत आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनाए रखने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) 2 मार्च से काम कर रहा है। इसका उद्देश्य स्थिति की निगरानी करना और सहायता उपायों का समन्वय करना है। आईएमजी ने 3 मार्च से दैनिक समीक्षा बैठकें शुरू कीं।
आईएमजी के विचार-विमर्श के आधार पर कई उपाय लागू किए गए हैं। इनमें फंसे हुए माल की आवाजाही के लिए प्रक्रियात्मक छूट, बंदरगाहों पर बेहतर समन्वय, बंदरगाहों पर प्रभावित माल के लिए भंडारण और ठहराव समय शुल्क की छूट, शिपिंग लाइन मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए सलाह और बीमा जोखिम विकास और अंतर्देशीय रसद आवाजाही की मजबूत निगरानी शामिल है।
राहत योजना को इस तरह से संरचित किया गया है कि यह व्यवधान की अवधि के दौरान पहले से भेजे गए शिपमेंट के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र में नियोजित संभावित निर्यात को कवर करके निर्यात चक्र में सहायता प्रदान करे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

