सीतारमण ने कहा- रुपये में उतार-चढ़ाव के पीछे वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार
नई दिल्ली/बेंगलुरु, 14 जून (हि.स)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव कई बार वैश्विक एवं घरेलू कारकों से प्रेरित होते हैं। इनमें भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, विदेशी पूंजी की आवाजाही और कच्चे तेल, उर्वरक तथा सोने पर भारत की आयात निर्भरता शामिल है।
सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) रकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर बेंगलुरु के पास देवनहल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। संवाददाताओं से बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि एक्सचेंज रेट कई बाहरी घटनाओं और बाजार की स्थितियों से प्रभावित होते हैं।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव के पीछे कई जटिल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, रुपये में यह गिरावट मुख्य रूप से बाहरी दबावों का परिणाम है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) सिर्फ बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए दखल देता है, न कि एक्सचेंज रेट को एक स्तर पर बनाए रखने के लिए। वित्त मंत्री ने बताया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले, वैश्विक मुद्राओं में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश की निकासी जैसे कारक रुपये की विनिमय दर को प्रभावित करते हैं।
सीतारमण ने आगे कहा कि अमेरिका में आर्थिक घटनाक्रमों के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों (एफडीआई) द्वारा मुनाफावसूली कर धन निकालने तथा अन्य बाजारों में अंतरित करने का भी विदेशी मुद्रा भंडार और मुद्रा विनिमय दरों पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल, उर्वरक और सोने के आयात के लिए भारत को बड़ी मात्रा में डॉलर का भुगतान करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन का महत्व बढ़ जाता है।
वित्त मंत्री ने कर्नाटक सरकार द्वारा केंद्र पर राज्य को उसका उचित हिस्सा नहीं देने के आरोपों पर कहा कि राज्यों को धन का आवंटन केंद्र सरकार नहीं, बल्कि वित्त आयोग तय करता है। उन्होंने कहा, ‘‘इसका सिद्धांत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या भारत सरकार तय नहीं करती।
सीतारमण ने कहा कि वित्त आयोग सभी राज्यों का दौरा कर विभिन्न मानकों के आधार पर निर्णय करता है। एक बार निर्णय हो जाने के बाद अगले पांच वर्षों तक केंद्र सरकार को उसी के अनुसार राज्यों को राशि देनी होती है।’’ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कनार्टक के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं।
--------------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

