ईपीएफओ ने संग्रह के सीधे भुगतान के लिए 15 नए बैंकों के साथ किया समझौता

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ईपीएफओ ने संग्रह के सीधे भुगतान के लिए 15 नए बैंकों के साथ किया समझौता


ईपीएफओ ने संग्रह के सीधे भुगतान के लिए 15 नए बैंकों के साथ किया समझौता


ईपीएफओ ने संग्रह के सीधे भुगतान के लिए 15 नए बैंकों के साथ किया समझौता


नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स.)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने मंगलवार को 15 अतिरिक्त सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ समझौते किए हैं, ताकि वार्षिक संग्रह में करीब 12,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष भुगतान संभव हो सके। साथ ही इन बैंकों में खाता रखने वाले नियोक्ताओं को सीधे पहुंच मिल सके।

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि ईपीएफओ ने नई दिल्ली में आज केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे की मौजूदगी में 15 अतिरिक्त सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ समझौते किए।

मंत्रालय के मुताबिक नए पैनल में शामिल 15 बैंक सालाना संग्रह में करीब 12,000 करोड़ रुपये का सीधा भुगतान करने में सक्षम होंगे और इन बैंकों में अपने खाते रखने वाले नियोक्ताओं को सीधे पहुंच प्रदान करेंगे। अधिनियम के तहत आने वाले नियोक्ताओं को अपना मासिक अंशदान देने में सक्षम बनाने के लिए ईपीएफओ ने पहले ही 17 बैंकों को पैनल में शामिल कर लिया है, जिससे कुल बैंकों की संख्या 32 हो गई है।

इस अवसर पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मंडाविया ने कहा कि नया भारत की दिशा में देश की प्रगति को ईपीएफओ जैसी संस्थाओं द्वारा महत्वपूर्ण समर्थन मिल रहा है, जो देश के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाती हैं। करीब 8 करोड़ सक्रिय सदस्यों और 78 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के साथ ईपीएफओ ऐसे लाभ प्रदान करता है, जो लाखों लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि ईपीएफओ किस तरह एक मजबूत आईटी प्रणाली के रूप में लगातार विकसित और अनुकूलनशील हो रहा है जिसने हाल ही में ईपीएफओ 2.01 के कार्यान्वयन के साथ-साथ दावा निपटान में उल्लेखनीय सुधार किया है। वित्‍त वर्ष 2024-25 में ईपीएफओ ने रिकॉर्ड 6 करोड़ से अधिक दावों का निपटारा किया, जो पिछले वित्‍त वर्ष 2023-24 में निपटाए गए 4.45 करोड़ दावों की तुलना में 35 फीसदी अधिक है।

डॉ. मंडाविया ने हाल ही में ईपीएफओ द्वारा शुरू किए गए महत्वपूर्ण सुधारों पर भी बात की। उन्‍होंने बताया कि ऑटो क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया एक बड़ा सुधार है, जिसने दावा प्रसंस्करण की गति में सुधार किया है। ऑटो-प्रोसेसिंग के साथ अब दावों का निपटान केवल तीन दिनों में किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में हमने इस प्रणाली के तहत 2.34 करोड़ दावों का निपटान किया है, जो वित्‍त वर्ष 2023-24 में 89.52 लाख दावों से 160 फीसदी अधिक है।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि ईपीएफओ अपने लाभार्थियों को 8.25 फीसदी ब्याज दर दे रहा है। सेवा वितरण में बैंकों की भागीदारी से ईएफएफओ की दक्षता बढ़ेगी और सुशासन में सुधार होगा। इस अवसर पर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति, एमडी और सीईओ तथा बैंकों, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और ईपीएफओ के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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