पीएफ निकासी से पेंशन पेमेंट सिस्टम तक हुए कई बदलाव, हर कर्मचारियों को जानने चाहिए ये नियम
नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स)। कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बीते साल 2025 बहुत खास रहा, क्योंकि इस दौरान कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पीएफ से जुड़े कई अहम बदलाव किए हैं। ये ऐसे बदलाव हैं, जो लगभग सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स पर असर डालते हैं। चाहे आप अपनी नौकरी बदल रहे हों, पीएफ निकालने की तैयारी कर रहे हों या नए कर्मचारी हों, आपके लिए इन बदलावों को समझना बेहद जरूरी है।
ईपीएफ योजना में कई प्रावधान होने के कारण पहले पीएफ निकासी प्रक्रिया जटिल थी, ईपीएफ निकासी प्रावधानों को 13 पैराग्राफ से एक पैराग्राफ में सरल बनाया गया है, जिसमें सरल पात्रता शर्तें शामिल हैं, सदस्य अब 75 फीसदी तक पीएफ आसानी से निकाल सकते हैं, जबकि शेष 25 फीसदी सेवानिवृत्ति बचत के लिए खाते में रखना होगा। अब पहले की 13 कैटेगरी को अब तीन में मिला दिया गया है, जिसमें जरूरी जरूरतें (बीमारी, पढ़ाई, शादी), घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं, जबकि अब आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि सिर्फ 12 महीने है।
मैनुअल क्लेम प्रोसेसिंग के कारण क्लेम सेटलमेंट में देरी होती थी, जिसमें सुधार किया गया है। पहले ऑटो एडवांस क्लेम सुविधा, जो पहले बीमारी के लिए थी, उसे घर, शादी और पढ़ाई तक बढ़ाया गया। इसकी लिमिट को 2025 में 5 लाख रुपया किया गया है, जबकि 47.48 फीसदी कुल क्लेम और 72.09 फीसदी एडवांस क्लेम ऑटो मोड में सेटल होते हैं। नौकरी बदलने के समय पीएफ ट्रांसफर के लिए सदस्यों को मैन्युअल रूप से दावा दायर करना होगा जनवरी 2025 से ऑटो ट्रांसफर रिक्वेस्ट सुविधा शुरू हुई, जिसमें सदस्य और नियोक्ता की कोई भागीदारी नहीं थी दिसंबर 2025 तक 65.75 लाख मामले संसाधित हुए, जिससे पीएफ ट्रांसफर निर्बाध हो गया।
इससे पहले बैंक खाता सीडिंग के लिए नियोक्ता अनुमोदन आवश्यक होने से देरी होता था। अप्रैल 2025 से नियोक्ता अनुमोदन के बिना बैंक खाता सत्यापन की सुविधा शुरू हुई, 1.07 करोड़ मामले संसाधित हुए। चेक लीफ या पासबुक अपलोड करने में त्रुटियों के कारण होने वाली देरी के कारण एनपीसीआई और सूचीबद्ध बैंकों के माध्यम से ऑनलाइन बैंक सत्यापन शुरू हुआ, बिना चेक अपलोड के दिसंबर तक 4.60 करोड़ दावे संसाधित हुए। पीएफ पासबुक केवल अलग पोर्टल पर उपलब्ध था, सदस्य पोर्टल पर पासबुक लाइट की शुरुआत हुई, जिससे अलग पोर्टल पर लॉगिन की जरूरत नहीं रही।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

