ई-रिक्शा और लॉजिस्टिक्स ईवी का बड़ा केंद्र बन रहा है उत्तर प्रदेश
नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेक्टर अब तेज रफ्तार वाले शुरुआती दौर से निकलकर स्थिर और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में वही कंपनियां टिकेंगी, जो मजबूत वित्तीय स्थिति, बेहतर तकनीक और भरोसेमंद सप्लाई चेन के साथ काम करेंगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश तेजी से ई-रिक्शा और लॉजिस्टिक्स ईवी का बड़ा केंद्र बन रहा है। सरकार की योजनाएं, बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतें और चार्जिंग सुविधाएं इस बदलाव को गति दे रही हैं।
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में देश में करीब 11–12 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और 6 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बिके। उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां ई-रिक्शा और ई-ऑटो की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इस संबंध में जुपेरिया ऑटो के सीईओ आयुष लोहिया ने ईवी टू-व्हीलर बाजार पर बात करते हुए कहा कि मौजूदा असमानता आने वाले समय में बाजार में एकीकरण को तेज़ करेगी। जिन कंपनियों के पास मजबूत पूंजी और बेहतर सप्लाई चेन है, वे मुश्किल हालात में भी टिक पाएंगी। वहीं, केवल ईवी पर निर्भर कई स्टार्टअप्स को आर्थिक दबाव झेलना पड़ेगा, जिससे अगले 18 से 24 महीनों में विलय या बाजार से बाहर होने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने बताया कि बैटरी, मोटर और अन्य जरूरी पुर्जों की आपूर्ति में रुकावट फिलहाल बड़ी चुनौती बनी हुई है।
लागत बढ़ने से मुनाफे पर असर, लागत और मुनाफे को लेकर उन्होंने कहा कि इनपुट लागत बढ़ने और सप्लाई में दिक्कत के कारण कई नई कंपनियों को अभी मुनाफा कमाने में समय लगेगा, लेकिन यह दौर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है। जो कंपनियां स्थानीय उत्पादन और बेहतर संचालन पर ध्यान देंगी, वही आगे बढ़ेंगी।
वित्त वर्ष 2027 के बारे में लोहिया ने कहा कि आने वाले वर्षों में ईवी सेक्टर और मजबूत होगा। शहरीकरण, ऑनलाइन डिलीवरी और छोटे कारोबार के बढ़ने से इलेक्ट्रिक कार्गो और थ्री-व्हीलर की मांग तेज़ी से बढ़ेगी। कम खर्च व जल्दी कमाई के कारण थ्री-व्हीलर इस बदलाव की रीढ़ बने रहेंगे।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में भी लगातार वृद्धि होगी, लेकिन यहां प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी होगी। इस क्षेत्र में वही कंपनियां टिकेंगी, जो अच्छी क्वालिटी, मजबूत सर्विस नेटवर्क और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखेंगी।
अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि 2008 से इस उद्योग को करीब से देखने के बाद मेरा मानना है कि आने वाला समय उन्हीं कंपनियों का होगा, जो जल्दबाजी के बजाय लंबी सोच के साथ काम करेंगी। देश में बढ़ती जागरूकता, सरकारी सहयोग और तकनीकी विकास के चलते आने वाले वर्षों में ईवी सेक्टर परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

