अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में गिरावट जारी, पश्चिम एशिया का युद्ध शुरू होने के पहले के स्तर पर पहुंची कीमत

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में गिरावट जारी, पश्चिम एशिया का युद्ध शुरू होने के पहले के स्तर पर पहुंची कीमत


नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अलग-अलग चैनल्स के जरिए हो रही बातचीत जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत भी नरम होती जा रही है। कच्चा तेल पहली बार पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने यानी 28 फरवरी के पहले वाले स्तर पर लौट आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमत युद्ध शुरू होने के पहले वाले स्तर पर आ गई है।

पश्चिम एशिया में युद्ध की शुरुआत होने के बाद से कच्चे तेल की कीमत में जबरदस्त तेजी का रुख बन गया था। दोनों पक्षों द्वारा ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने, खाड़ी के देशों में कच्चे तेल का उत्पादन बाधित होने और होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते कच्चे तेल की सप्लाई ठप पड़ जाने की वजह से 30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि अब पश्चिम एशिया में तनाव घटने का संकेत मिलने के कारण कच्चे तेल की कीमत में ऊपरी स्तर से लगभग 42 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।

28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के पहले 27 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। आज 27 फरवरी के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से भी नीचे चला गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड आज 69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से भी नीचे पहुंच गया।

ब्रेंट क्रूड ने आज 73.25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। कारोबार की शुरुआत होने के बाद इसकी कीमत में गिरावट आने लगी। भारतीय समय के मुताबिक सुबह 8:45 बजे ब्रेंट क्रूड 72.12 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया था। हालांकि बाद में इसके भाव में तेजी का रुख भी बना। भारतीय समय के मुताबिक शाम 6:45 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.83 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 73.13 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे फिसल कर 69.97 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। दिन के कारोबार में डब्ल्यूटीआई क्रूड गिर कर 68.90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया। बाद में इसके भाव में थोड़ी तेजी भी आई। भारतीय समय के मुताबिक शाम छह बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 69.82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि कच्चे तेल की सप्लाई में हुई बढ़ोतरी और अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति के प्रयास में प्रगति के संकेत मिलने से की वजह से कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है। टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत कब तक युद्ध शुरू होने के पहले वाले स्तर पर बनी रहेगी, इस बाबत अभी पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान जिस तरह दोनों पक्षों ने ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया, उसकी वजह से आने वाले दिनों में कच्चे तेल के उत्पादन में परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

वैष्णव का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद दुनिया के तमाम ऑयल इंपोर्टर्स ने वैकल्पिक रास्तों से कच्चा तेल मंगाना शुरू कर दिया था। अब शांति वार्ता की प्रगति के साथ ही होर्मुज स्ट्रेट से भी ऑयल टैंकर्स की आवा-जाही कुछ हद तक शुरू हो गई है। इसकी वजह से ऑयल इंपोर्टर्स के पास कच्चे तेल का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में पहुंच गया है।

ऑयल इंपोर्टर्स के पास पश्चिम एशिया से इतर दूसरे देशों से भी कच्चा तेल अपेक्षित मात्रा में पहुंचने लगा है। इसके साथ ही खाड़ी देशों में पहले से दिए गए ऑर्डर की भी सप्लाई शुरू हो गई है। इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मांग में तुलनात्मक तौर पर गिरावट आई है, जिसका असर इसकी कीमत में कमजोरी के रूप में नजर आ रहा है। वैष्णव का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल के पुराने ऑर्डर खत्म होने के बाद जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी की मांग दोबारा बढ़ेगी, तब इसकी कीमत में एक बार फिर उछाल आ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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