कैट ने व्यवसायों के लिए आवश्यकता आधारित ऋण नीति पर वित्त मंत्री के आह्वान का किया स्वागत

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कैट ने व्यवसायों के लिए आवश्यकता आधारित ऋण नीति पर वित्त मंत्री के आह्वान का किया स्वागत


कैट ने व्यवसायों के लिए आवश्यकता आधारित ऋण नीति पर वित्त मंत्री के आह्वान का किया स्वागत


नई दिल्ली, 26 मई (हि.स)।कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सिडबी के कार्यक्रम में दिए गए उस महत्वपूर्ण वक्तव्य का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि गैर-मानक व्यवसायों की आवश्यकताओं को सामान्य वित्तीय उत्पादों से पूरा नहीं किया जा सकता और ऋण उत्पादों को उद्यमों के व्यावसायिक चक्र के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री तथा चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने मंगलवार को कहा कि यह वक्तव्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। खंडेलवाल ने कहा कि वित्त मंत्री सीतारमण का ये वक्तव्य अत्यंत व्यावहारिक, दूरदर्शी और भारत के एमएसएमई तथा व्यापारिक समुदाय की वास्तविक वित्तीय चुनौतियों को समझने वाला है।

खंडेलवाल ने आगे कहा कि वित्त मंत्री निर्मला संतारमण ने बिल्कुल सही कहा है कि अलग-अलग व्यवसायों की वित्तीय एवं परिचालन संरचना अलग होती है। उन्होंने बताया कि कृषि आधारित उद्यमों की आय मौसमी होती है, हॉस्पिटैलिटी एवं रिसॉर्ट व्यवसायों की आय वर्ष भर समान नहीं रहती, निर्यातकों को माल भेजने के बाद भुगतान प्राप्त होने में समय लगता है, ऑटो कंपोनेंट आपूर्तिकर्ता इनवॉइस भुगतान पर निर्भर रहते हैं, जबकि अनेक महिला उद्यमियों के पास संपत्ति स्वामित्व न होने के बावजूद मजबूत लेन-देन रिकॉर्ड होता है।

कैट महामंत्री ने कहा कि वित्त मंत्री का कहना कि ऐसे विविध स्वरूप वाले उद्यमों पर एक समान ऋण पुनर्भुगतान संरचना थोपना न तो व्यावहारिक है और न ही व्यापार हितैषी, बेहद तार्किक है। खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारिक समुदाय लंबे समय से लचीली एवं क्षेत्र-विशिष्ट ऋण नीतियों की मांग करता रहा है। कठोर बैंकिंग ढांचे और मानक पुनर्भुगतान अनुसूचियां अक्सर छोटे व्यापारियों एवं उद्यमियों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सिडबी और बैंकिंग प्रणाली को लचीले तथा उद्यम-विशिष्ट ऋण उत्पाद तैयार करने का दिया गया आह्वान एक महत्वपूर्ण सुधारवादी दिशा है, जिससे ऋण उपलब्धता बढ़ेगी, वित्तीय दबाव कम होगा और पुनर्भुगतान अनुशासन भी मजबूत होगा। खंडेलवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि इस दिशा-निर्देश के अनुरूप सिडबी तथा अन्य वित्तीय संस्थान अपनी ऋण प्रणाली में व्यावहारिक सुधार करेंगे और एमएसएमई एवं व्यापारियों के लिए ऋण को अधिक सुलभ बनाएंगे।

खंडेलवाल ने कहा कि कैट इस प्रगतिशील पहल का पूर्ण समर्थन करता है और व्यापारिक समुदाय की ओर से रचनात्मक सुझाव देने के लिए सदैव तैयार है, ताकि भारत के लिए अधिक समावेशी, व्यावहारिक और विकासोन्मुख ऋण ढांचा तैयार किया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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