पीलीभीत में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र खुलेगा, एपीडा का यूपी सरकार से समझौता

WhatsApp Channel Join Now
पीलीभीत में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र खुलेगा, एपीडा का यूपी सरकार से समझौता


पीलीभीत में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र खुलेगा, एपीडा का यूपी सरकार से समझौता


नई दिल्ली, 30 अप्रैल (हि.स)। देश में बासमती चावल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए पीलीभीत में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र

खोला जायेगा। इसके लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 70 वर्ष के पट्टे समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। पीलीभीत के टांडा बिजैसी में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म की स्थापना के लिए भूमि हस्तांतरण को औपचारिक रूप दिया गया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक प्रस्तावित बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म लगभग सात एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र में सभागार, बासमती एवं जैविक खेती पर संग्रहालय और गैलरी, सम्मेलन कक्ष, प्रयोगशाला और जैविक खेती के लिए आवश्यक सामग्री के भंडारण की सुविधा उपलब्ध होगी। यह सुविधा बासमती एवं जैविक किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहायक होगी और कृषि विशेषज्ञों एवं छात्रों के लिए एक संसाधन केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस पहल की सराहना करते हुए पीलीभीत को बासमती चावल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाओं की जानकारी दी। जितिन प्रसाद ने भारत की पहली एआई-आधारित बासमती धान सर्वेक्षण परियोजना (2026-2028) का भी अनावरण किया, जिसे एपीईडीए अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (एआरआईईए) के सहयोग से कार्यान्वित किया जाएगा।

मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना लगभग 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगी, 150,000 से अधिक जमीनी स्तर के सर्वेक्षण बिंदुओं से डेटा एकत्र करेगी और 500,000 से अधिक किसानों के साथ मिलकर कार्य करेगी। इसका उद्देश्य सटीक फसल मूल्यांकन, किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक परामर्श सेवाएं और बेहतर निर्यात योजना में सहयोग करना है।

इस कार्यक्रम में वाणिज्य और उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, जिले के वरिष्ठ जन प्रतिनिधि, एपीईडीए के अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य हितधारक उपस्थित थे। एपीडा सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने में सहायता के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन सहायता और बाजार संपर्क पहलों के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है। ये प्रयास पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार उत्पादों की वैश्विक मांग के अनुरूप हैं।

भारत का भौगोलिक संकेत (जीआई) प्राप्त उत्पाद बासमती चावल का निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का रहा, जिसमें निर्यात की मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इस क्षेत्र की मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में मजबूत उपस्थिति के साथ भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

Share this story